
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सेवानिवृत्ति के बाद 23 लाख 93 हजार 830 रुपये की वसूली के आदेश को हाई कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी राज्य की एसएलपी खारिज किए जाने के बावजूद आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की गई है।
सागर निवासी याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने पक्ष रखा। मामले के अनुसार याचिकाकर्ता 31 मई 2020 को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके करीब एक माह बाद 26 जून 2020 को विभाग ने 23,93,830 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया।
पेंशन सहित सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान भी नहीं किया गया। इसके खिलाफ याचिका दायर की गई। हाई कोर्ट ने फुल बेंच में दिए निर्णय के आधार पर वसूली आदेश रद कर दिया था। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि यदि राशि वसूल की गई है तो उसे 30 दिन में आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाया जाए।
दो साल तक मामले का निस्तारण नहीं
साथ ही सेवानिवृत्ति देयकों का 30 दिन में निपटारा करते हुए एक जुलाई 2020 से मावास्तविक भुगतान तक आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए थे। याचिका के अनुसार, आदेश के बाद भी विभाग ने करीब दो वर्ष तक मामले का निराकरण नहीं किया। इसके बाद वर्ष 2026 में राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई।
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याचिकाकर्ता के पति का हुआ निधन
छह जुलाई 2026 को विलंब माफी आवेदन स्वीकार हुआ और 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी मेरिट पर खारिज कर दी। इसी बीच 22 अप्रैल 2026 को याचिकाकर्ता के पति रमेश कुमार शर्मा का निधन हो गया।
याचिकाकर्ता ने स्वयं को उनकी वैध पत्नी बताते हुए विधिक उत्तराधिकारी के रूप में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। हाई कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को अवमानना प्रकरण में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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