
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 की मप्र पुलिस भर्ती में सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर पदों के लिए सात अप्रैल, 2015 को जारी मेरिट सूची के विवादित हिस्से को निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और कर्मचारी चयन बोर्ड को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 12 सप्ताह के भीतर नियमों के अनुरूप संशोधित मेरिट सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मामले में 162 अंक प्राप्त करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से आपत्ति उठाई गई थी कि उनकी पहली पसंद जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक पद थी, लेकिन उन्हें प्लाटून कमांडर पद आवंटित किया गया। उनका कहना था कि वे संबंधित कटऑफ से केवल एक अंक पीछे थे।
विवाद का प्रमुख बिंदु यह था कि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने आयु सीमा में छूट का लाभ लिया था, उन्हें अनारक्षित पदों पर समायोजित कर दिया गया था।
एकलपीठ ने भर्ती नियमों के नियम 12(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार द्वारा आयु सीमा में छूट का लाभ लेने के बाद उसे अनारक्षित पद पर समायोजित नहीं किया जा सकता।
ऐसा करने से उसे आरक्षण के दोहरे लाभ की स्थिति उत्पन्न होती है। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के साजिब राय और बलबीर सिंह गुर्जर मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।
राज्य सरकार और चयन बोर्ड की ओर से करीब 10 वर्ष की देरी के आधार पर याचिकाओं पर आपत्ति की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि नियमों के उल्लंघन से प्रभावित भर्ती प्रक्रिया को केवल देरी के आधार पर कायम नहीं रखा जा सकता।
यह भी पढ़ें- जबलपुर पहुंचे ओलिंपियन स्टार शूटर गगन नारंग बोले- संस्कारधानी में बेहतरीन शूटरों की कमी नहीं, जरूरत है प्लेटफॉर्म की