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2013 की पुलिस भर्ती की 2015 मेरिट सूची का विवादित हिस्सा रद, हाई कोर्ट ने कहा-12 सप्ताह में संशोधित मेरिट सूची बनाएं

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी मेरिट सूची अथवा आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की नियुक्तियां निरस्त नहीं की जा रही हैं, बल्कि अनारक्षित पदों पर किए गए गलत ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 08:35:07 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 08:35:07 PM (IST)
2013 की पुलिस भर्ती की 2015 मेरिट सूची का विवादित हिस्सा रद, हाई कोर्ट ने कहा-12 सप्ताह में संशोधित मेरिट सूची बनाएं
कोर्ट ने माना कि नियमों के उल्लंघन से प्रभावित भर्ती प्रक्रिया को केवल देरी के आधार पर कायम नहीं रखा जा सकता।

HighLights

  1. आयु छूट लेने वालों को अनारक्षित पद देने पर आपत्ति
  2. पहली पसंद जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक पद थी
  3. आरक्षण के दोहरे लाभ की स्थिति उत्पन्न होती है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 की मप्र पुलिस भर्ती में सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर पदों के लिए सात अप्रैल, 2015 को जारी मेरिट सूची के विवादित हिस्से को निरस्त कर दिया है।

संशोधित मेरिट सूची तैयार करने के निर्देश

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और कर्मचारी चयन बोर्ड को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 12 सप्ताह के भीतर नियमों के अनुरूप संशोधित मेरिट सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से आपत्ति उठाई गई थी

मामले में 162 अंक प्राप्त करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से आपत्ति उठाई गई थी कि उनकी पहली पसंद जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक पद थी, लेकिन उन्हें प्लाटून कमांडर पद आवंटित किया गया। उनका कहना था कि वे संबंधित कटऑफ से केवल एक अंक पीछे थे।

आयु सीमा में छूट का लाभ लिया था

विवाद का प्रमुख बिंदु यह था कि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने आयु सीमा में छूट का लाभ लिया था, उन्हें अनारक्षित पदों पर समायोजित कर दिया गया था।

अनारक्षित पद पर समायोजित नहीं किया जा सकता

एकलपीठ ने भर्ती नियमों के नियम 12(4) का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार द्वारा आयु सीमा में छूट का लाभ लेने के बाद उसे अनारक्षित पद पर समायोजित नहीं किया जा सकता।

आरक्षण के दोहरे लाभ की स्थिति उत्पन्न

ऐसा करने से उसे आरक्षण के दोहरे लाभ की स्थिति उत्पन्न होती है। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के साजिब राय और बलबीर सिंह गुर्जर मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।

10 वर्ष की देरी के आधार पर याचिकाओं पर आपत्ति

राज्य सरकार और चयन बोर्ड की ओर से करीब 10 वर्ष की देरी के आधार पर याचिकाओं पर आपत्ति की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि नियमों के उल्लंघन से प्रभावित भर्ती प्रक्रिया को केवल देरी के आधार पर कायम नहीं रखा जा सकता।


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