
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सर्द सीजन में रोजाना सामने आ रही आगजनी की घटनाओं ने जबलपुर के व्यस्त बाजार क्षेत्र घमंडी चौक स्थित तीन मंजिला 'दुलारी हाट मार्केट' के व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। चिंता का मुख्य कारण यह है कि मार्केट भवन में आग से बचाव के पुख्ता प्रबंध ही नहीं हैं। व्यापारियों की शिकायत के बाद पिछले दिनों नगर निगम के अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण तो किया, लेकिन उनकी जांच भी सिर्फ एक बड़े व्यापारी के शोरूम तक सीमित रही। इधर, मार्केट भवन का निर्माण कराने वाले बिल्डर भी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।
व्यापारियों का आरोप है कि मार्केट भवन का निर्माण कराने वाले मेसर्स राजकुमार अग्रवाल द्वारा अग्नि हादसों की रोकथाम के लिए जरूरी उपायों की अनदेखी की गई है। नियमानुसार निर्माण के दौरान ही फायर सेफ्टी के इंतजाम किए जाने थे, लेकिन भवन में फायर अलार्म, हाइड्रेंट, फायर एग्जिट और एक्सटिंग्विशर जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। इसके अलावा, आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए जरूरी 'ओपन टू स्काई' स्पेस और वेंटिलेशन मानकों का भी अभाव है। बिल्डर ने लिफ्ट का ढांचा तो खड़ा कर दिया, लेकिन लिफ्ट लगवाई ही नहीं, जिससे तीन मंजिला भवन में आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है।
मार्केट का 80 प्रतिशत क्षेत्र एक बड़े व्यापारी ने खरीद लिया है और उन्होंने अपने स्तर पर सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। शेष छोटे व्यापारी बिल्डर के भरोसे रहे, जो अब अपने वादों से मुकर रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि नगर निगम के अग्निशमन अधिकारी केवल बड़े व्यापारी के इंतजाम देखकर लौट गए और मान लिया कि पूरे मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त है। वास्तविकता यह है कि बिल्डिंग में बिजली के मीटर खुले हैं और तारों का मकड़जाल लटक रहा है। यदि शॉर्ट सर्किट से आग लगती है, तो यह बड़े हादसे का रूप ले सकती है, क्योंकि छोटे व्यापारियों के पास सुरक्षा के नाम पर केवल खुद के खरीदे हुए छोटे सिलेंडर ही हैं।
व्यापारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'दुलारी हाट बाजार' के नाम से संचालित इस भवन के निर्माण में बिल्डर द्वारा भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए, तो बड़ी गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। महत्वपूर्ण मानकों को नजरअंदाज करते हुए बिल्डर ने अधूरे निर्माण के बीच ही भवन को बेच दिया, जिसका खामियाजा अब वहां व्यापार करने वाले लोग भुगत रहे हैं।