
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मदन महल रेलवे स्टेशन पर भोपाल से आने वाली रानी कमलापति जनशताब्दी एक्सप्रेस से उतरकर पैदल पटरी पार कर रहे छह यात्री माल गाड़ी के इंजन से टकरा गए थे, जिसमें महिला व बच्चे की मौत हो गई थी। घटना के बावजूद लोग जिंदगी खतरें में डालकर रेल पटरी पार कर रहे है।
हादसे के बाद रेलवे ने ट्रैक पार करने से रोकने के लिए दो प्लेटफार्मों के बीच रैलिंग लगाई थी, लेकिन यात्री अब उसी रैलिंग को फांदकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
रेलवे, आरपीएफ और जीआरपी लगातार कार्रवाई कर रही हैं, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी रुकने का नाम नहीं ले रही। इससे बड़ी अनहोनी का खतरा बना हुआ है।
मदन महल स्टेशन के पुनर्विकास के बाद यहां ट्रेनों और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है। रायपुर इंटरसिटी, रानी कमलापति इंटरसिटी, जनशताब्दी, श्रीधाम, अमरकंटक, नर्मदा, सोमनाथ, ओवरनाइट एक्सप्रेस सहित मेमू और पैसेंजर ट्रेनों के समय स्टेशन पर भारी भीड़ रहती है।
ऐसे समय में यात्री एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जल्दी पहुंचने के लिए निर्धारित मार्ग छोड़कर ट्रैक पार करने का जोखिम उठा रहे हैं। स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज एवं रैंप के सुविधाजनक विकल्पों का अभाव भी यात्रियों की इस लापरवाही की बड़ी वजह माना जा रहा है।
यदि ट्रेन मुख्य स्टेशन एंड की ओर रुकती है तो यात्रियों को पहले लंबी दूरी तय कर फुटओवर ब्रिज तक पहुंचना पड़ता है, फिर ब्रिज की खड़ी सीढ़ियां चढ़कर दूसरे प्लेटफार्म पर उतरने के बाद दोबारा काफी दूर पैदल चलना पड़ता है। यही कारण है कि कई यात्री समय बचाने के लिए रैलिंग फांदकर सीधे ट्रैक पार कर लेते हैं।
स्टेशन पर प्लेटफार्म एक एवं दो-तीन के बीच एक-एक लिफ्ट एवं प्लेटफार्म चार पर लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा है, लेकिन व्यस्त समय में इन पर अत्यधिक दबाव रहता है।
लिफ्ट में लंबा इंतजार, कनेक्टिंग ट्रेन छूटने का डर और जल्द बाहर निकलने की जल्दबाजी यात्रियों को शाॅर्टकट अपनाने के लिए प्रेरित करती है। महिला, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोग भी कई बार इसी जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं।
रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर ट्रैक पैदल पार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर जुर्माना भी लगाया जाता है।
स्टेशन परिसर में उद्घोषणाओं के माध्यम से भी यात्रियों से केवल फुटओवर ब्रिज या अधिकृत मार्ग का उपयोग करने की अपील की जाती है। इसके बावजूद मौका मिलते ही लोग रैलिंग फांदकर ट्रैक पार कर रहे हैं।
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