
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सिंगरौली की बीटेक छात्रा की संदिग्ध मौत की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस विवेचना निष्पक्ष, वैज्ञानिक और भरोसा जगाने वाली नहीं दिखती।
कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने और ट्रायल शुरू हो जाने के कारण सीबीआई अथवा एसआईटी से नए सिरे से जांच कराने से इन्कार कर दिया। हालांकि पीड़ित पक्ष को ट्रायल कोर्ट में आरोपों में संशोधन अथवा नई धाराएं जोड़ने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है।
सिंगरौली निवासी दीपांजलि पनिका ने यह याचिका दायर कर अपनी बहन की मौत की सीबीआई अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच, संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना, राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रियंका मिश्रा तथा प्रतिवादी नम्बर दो की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने पक्ष रखा। मृतका एलएनसीटी कालेज की बीटेक (कंप्यूटर साइंस) की छात्रा थी और उसका शव सिंगरौली के भगत सिंह कालोनी में 22 जून, 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।
कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम में देरी, विसरा समय पर फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजना, घटनास्थल की वैज्ञानिक पड़ताल नहीं करना, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगतियां तथा साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही जैसी बातें जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करती हैं। इसके बावजूद ट्रायल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए नए सिरे से जांच कराना न्यायोचित नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक, सिंगरौली को तत्कालीन थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारी के आचरण की विभागीय जांच कर 30 दिन के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि यदि जांच में गंभीर चूक या साक्ष्य दबाने के तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।