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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश का पहला नगर निगम होने का गौरव रखने वाला जबलपुर नगर निगम आज भी अपने नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है।
नर्मदा तट पर बसे इस शहर में हर घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर की लगभग आधी आबादी बदबूदार और गंदा पानी पीने को मजबूर है।
वर्ष 1950 में नगर निगम की स्थापना के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों और प्रशासकों के कार्यकाल में पेयजल व्यवस्था सुधारने के दावे किए गए। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) और अमृत योजना जैसी योजनाओं के तहत नगर निगम को करोड़ों रुपये मिले।
बीते 10 वर्षों में ही पाइपलाइन विस्तार और सुधार कार्य पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
शहर के अधिकांश इलाकों में पेयजल पाइपलाइन ड्रेनेज और नाला-नालियों से होकर गुजर रही हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी हुई हैं।
जबकि जल वितरण लाइनों की औसत उम्र 20 वर्ष मानी जाती है, कई क्षेत्रों में 40 से 50 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइनों से ही पानी सप्लाई की जा रही है। अधारताल और गोहलपुर जैसे इलाकों में लोग नालों से होकर गुजरने वाली फूटी पाइपलाइनों से पानी भरकर पीने को मजबूर हैं।
मोतीलाल नेहरू वार्ड के आधारताल क्षेत्र में आदिवासी छात्रावास के पास से गुजरने वाले नाले के भीतर पेयजल पाइपलाइन डाली गई है। नाले के क्षारीय पानी के संपर्क में रहने से पाइपलाइन में क्षरण हो रहा है। लीकेज के कारण अशोक नगर सहित आसपास के इलाकों में सुबह-शाम नलों से पहले गंदा और बाद में साफ पानी आता है। हालांकि यह साफ पानी भी पीने योग्य है या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
मोतीनाला बंधैया मोहल्ला, लालमाटी, लेमागार्डन परिसर, मोहरिया और अब्दुल कुरैशी कंपाउंड जैसे क्षेत्रों में भी यही हाल है। नालियों में डूबी पाइपलाइनों के कारण लोगों को बदबूदार पानी मिल रहा है और बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
नगर निगम 1 लाख 71 हजार से अधिक घरेलू कनेक्शनों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 271 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहा है। पांच जलशोधन संयंत्रों के संचालन, पाइपलाइन रखरखाव, बिजली बिल और जलापूर्ति व्यवस्था पर सालाना लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शुद्ध पानी की गारंटी अब भी अधूरी है।
अशोक नगर निवासी प्रेमचंद विश्वकर्मा का कहना है कि वर्षों से नाले के भीतर से पाइपलाइन गुजर रही है। लीकेज के कारण घरों में गंदा पानी आता है और इसी पानी को मजबूरी में पीना पड़ता है, जिससे बीमारियां बढ़ रही हैं।
वहीं अक्कू गुप्ता का कहना है कि सुबह-शाम पहले गंदा और फिर साफ पानी आता है, लेकिन उसकी शुद्धता पर भरोसा नहीं किया जा सकता। नगर निगम को पाइपलाइन व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए।
जल विभाग के कार्यपालन यंत्री कमलेश श्रीवास्तव का कहना है कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
पानी की नियमित जांच कराई जा रही है और जोन स्तर पर लीकेज पाइपलाइनों की निगरानी कर उन्हें बदला जा रहा है। नागरिक पेयजल संबंधी शिकायतें हेल्पलाइन नंबर 0761-2637509 पर दर्ज करा सकते हैं।