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जिला न्यायालय का फैसला : दो हजार रुपये बरामद हुए, फिर भी रिश्वत का अपराध साबित नहीं

केवल मुद्रा की बरामदगी से पीसी एक्ट की धारा-सात के तहत अपराध स्वतः गठित नहीं होता। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपित को दोषमुक्त कर दिया...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 09:44:23 AM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 09:44:23 AM (IST)
जिला न्यायालय का फैसला : दो हजार रुपये बरामद हुए, फिर भी रिश्वत का अपराध साबित नहीं
विशेष न्यायालय ने कहा कि अभियोजन को असम्यक लाभ की मांग किए जाने का तथ्य भी प्रमाणित करना होगा।

HighLights

  1. सिर्फ रकम मिलने से पीसी एक्ट की धारा-सात लागू नहीं
  2. सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त किया
  3. रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, रकम मिलने के बावजूद छोड़ा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने और रकम बरामद होने के बावजूद अभियोजन यदि यह साबित नहीं कर पाए कि आरोपित ने रिश्वत की मांग की थी, तो केवल रकम की बरामदगी के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने पीसी एक्ट के मामले में यह महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित करते हुए सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त कर दिया।

अभियोजन के मुताबिक लोकायुक्त जबलपुर ने संभागीय उपायुक्त, वाणिज्य कर कार्यालय में पदस्थ श्रीवास्तव को दो हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा था। आरोप था कि उन्होंने एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल एजेंसी, मुंबई के अधिकृत प्रतिनिधि सुरेश कुमार गुप्ता से सेल्स टैक्स निर्धारण संबंधी फाइल दिखाने और प्रस्तुत करने के एवज में रिश्वत मांगी थी।


आवाज की पहचान भी प्रमाणित नहीं :

बचाव पक्ष की अधिवक्ता नम्रता के. अग्रवाल ने न्यायालय में तर्क दिया कि कथित रिश्वत मांगने की रिकार्डिंग में आरोपित की आवाज होने का तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ। शिकायतकर्ता और आरोपी पूर्व परिचित थे तथा दोनों के बीच पहले विवाद भी हो चुका था। जिस फाइल को दिखाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप था, उससे संबंधित अपीलीय आदेश पूर्व में ही संबंधित जर्नल में प्रकाशित हो चुका था।

धारा 20 की उपधारणा के लिए मांग जरूरी :

विशेष न्यायालय ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 20 के तहत उपधारणा के लिए आरोपित के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद होना अकेले पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को असम्यक लाभ की मांग किए जाने का तथ्य भी प्रमाणित करना होगा। केवल मुद्रा की बरामदगी से पीसी एक्ट की धारा-सात के तहत अपराध स्वतः गठित नहीं होता। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने आरोपित को दोषमुक्त कर दिया।

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