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MP High Court ने कहा कि टाइगर के लिए अंडरपास बनाया तो सामने जंगल कैसे दिखेगा

दरअसल, अमरावती, महाराष्ट्र निवासी अद्वैत क्योले की याचिका में बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-46 को फोरलेन में बदलने के कार्य को चुनौती दी गई ह...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 11 Aug 2026 08:30:51 AM (IST)Updated Date: Tue, 11 Aug 2026 08:30:51 AM (IST)
MP High Court ने कहा कि टाइगर के लिए अंडरपास बनाया तो सामने जंगल कैसे दिखेगा
हाई कोर्ट ने कहा- टाइगर को सामने खुला जंगल दिखाई देगा, तभी वह सड़क पार करेगा।

HighLights

  1. बैतूल-भोपाल फोरलेन मामले में एनटीसीए की आपत्ति
  2. सभी संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक के निर्देश
  3. निर्णय की रिपोर्ट चार सप्ताह बाद पेश करने कहा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग के जंगल क्षेत्र से फोरलेन सड़क निकालने के मामले में एनटीसीए, एनएचएआइ, केंद्रीय सड़क परिवहन विभाग और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को संयुक्त बैठक कर रास्ता निकालने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बैठक में लिए गए निर्णय की रिपोर्ट चार सप्ताह बाद पेश करने कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।

सड़क दुर्घटनाओं में उनके मारे जाने का खतरा रहेगा

याचिकाकर्ता का कहना है कि केसला-भौंरा-बरेठा के जंगल क्षेत्र से सड़क निकालने के लिए एनटीसीए की अनुमति नहीं ली गई। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा आने और सड़क दुर्घटनाओं में उनके मारे जाने का खतरा रहेगा।

10.5 किमी हिस्सा ऊपर से ले जाने की थी सिफारिश

पूर्व सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा था कि एनटीसीए ने 19.5 किमी जंगल क्षेत्र में से 10.5 किमी हिस्से को ऊपर से ले जाने की सिफारिश की थी, फिर उसका पालन क्यों नहीं हो रहा। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सड़क के नीचे टाइगर के लिए संकरा रास्ता बनाना उचित नहीं है। टाइगर को सामने खुला जंगल दिखाई देगा, तभी वह सड़क पार करेगा। अंडरपास में जाने की संभावना कम है और वह कभी भी सड़क पर आ सकता है।


तीन किमी क्षेत्र में फ्लाईओवर प्रभावित

एनएचएआइ ने फ्लाईओवर निर्माण की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। सुनवाई में एनटीसीए ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में फ्लाईओवर का कार्य प्रभावित होने की जानकारी दी। कोर्ट ने सभी पक्षों की बैठक कर समाधान निकालने के निर्देश दिए।

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