
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दीवाली पर आतिशबाजी, धुएं और बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस, आंख और त्वचा संबंधी मरीजों की संख्या में हर साल तेजी से इजाफा होता है।
स्वास्थ्य विभाग ने दवा, डाॅक्टर और ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिला अस्पताल प्रशासन ने तैयारी के रूप में एक टीम बनाई हुई है जो ऐसी अग्नि दुर्घटनाओं से पीड़ितों के उपचार के लिए 24/7 दिन ड्यूटी पर रहेगी, कोई ना कोई डाॅक्टर अस्पताल में रहेगा उनका रोस्टर बनाया गया है।
ऐसी दुर्घटनाओं से घायल होने वाले पीड़ितों के लिए हमने अस्पताल में पांच बेड आरक्षित किए हुए हैं तथा पीड़ितों के उपचार के लिए मानव संसाधन और दवाइयों की तैयारी की हुई है। साथ ही 24 घंटे पल्मोनोलाजिस्ट, नेत्र रोग और त्वचा रोग विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई गई है।
नेबुलाइजर, ऑक्सीजन सिलिंडर, एंटी-एलर्जिक आई ड्राप, आर्टिफिशियल टियर्स, बर्न क्रीम और एंटीहिस्टामिन दवाओं का स्टाक बढ़ाया गया है। औसतन प्रदूषण से जुड़ी बीमारी पर भर्ती का खर्च 55,263 रुपये और प्रतिदिन 19 हजार रुपये तक आता है, इसलिए गरीब मरीजों के लिए निश्शुल्क दवा काउंटर भी सक्रिय किए गए हैं।
सीएमएचओ डाॅॅ. नवीन कोठारी ने लोगों से अपील की है कि पटाखों से दूरी रखें, मास्क पहनें, आंखों को बार-बार न मलें और आंखों में जलन होने पर साफ पानी से धोएं। अस्थमा और सीओपीडी के मरीज इनहेलर साथ रखें और सुबह-शाम पीक आवर में बाहर निकलने से बचें। सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी आपात स्थिति के लिए इमरजेंसी टीम तैयार रहे।
दिवाली के बाद प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के मामलों में हर साल औसतन 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने वाले मामलों में 9 प्रतिशत केस अकेले दीपावली के आसपास आते हैं।
10 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रहती है, जो सबसे ज्यादा प्रभावित समूह है। दिवाली के बाद रेस्पिरेटरी ओपीडी में 30 प्रतिशत तक मरीज बढ़ जाते हैं। रोजाना 300 से 350 मरीज सांस लेने में तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न के साथ पहुंचते हैं।
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