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तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी की फांसी टली, हाईकोर्ट ने उम्र कैद में बदली सजा

शहडोल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी रामनारायण ढीमर की फांसी हाई कोर्ट ने 25 वर्ष की उम्रकैद में बदली, बिना माफी या छूट।

By Ramkrishan paramhans pandeyEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 02:26:19 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 02:26:19 PM (IST)
तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी की फांसी टली, हाईकोर्ट ने उम्र कैद में बदली सजा
तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी की फांसी टली। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने रामनारायण ढीमर की फांसी की सजा बदली।
  2. दोषी को 25 वर्ष की उम्रकैद भुगतनी होगी।
  3. सजा अवधि में किसी माफी या छूट का लाभ नहीं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर : हाई कोर्ट ने शहडोल जिले में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपित की फांसी की सजा को 25 वर्ष की उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपित को 25 वर्ष की सजा पूरी होने तक किसी प्रकार की माफी या सजा में छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

अधीनस्थ अदालत ने सुनाया था मृत्युदंड

  • न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय बुढ़ार द्वारा भेजे गए डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया।
  • मुख्य आरोपित रामनारायण ढीमर को अधीनस्थ अदालत ने 13 जनवरी 2026 को मृत्युदंड सुनाया था। अभियोजन के अनुसार एक मार्च, 2023 की रात शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम छिरहटी में आरोपी ने पड़ोस की तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी।

सुधार व पुनर्वास की संभावना को माना महत्वपूर्ण

हाई कोर्ट ने आरोपित की उम्र, उसके आपराधिक इतिहास और सुधार की संभावना को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि आरोपित का कोई पूर्व आपराधिक रिकार्ड नहीं है और 32 वर्ष की उम्र में उसके सुधार व पुनर्वास की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसलिए मामला रेयरेस्ट आफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता।

पत्नी और दोस्त हुए बरी

मामले में आरोपित की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को अधीनस्थ अदालत द्वारा दी गई चार-चार वर्ष की सजा भी हाई कोर्ट ने निरस्त कर दोनों को बरी कर दिया।