
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका में भाजपा के तीन निर्वाचित सांसदों को जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवसर पर जवाब दाखिल नहीं किया गया तो उनका लिखित जवाब प्रस्तुत करने का अधिकार समाप्त कर दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान यह निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की है। मामला कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका से संबंधित है।
याचिका में भाजपा के निर्वाचित राज्यसभा सदस्य महेश केवट के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। साथ ही निर्वाचन प्रक्रिया में अपनी उम्मीदवारी का नामांकन निरस्त किए जाने को भी अनुचित बताया गया है। याचिका में राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और रजनीश कुमार अग्रवाल को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
तीनों सांसदों का निर्वाचन निर्विरोध हुआ था। दरअसल, तेलंगाना में लंबित आपराधिक शिकायत से संबंधित जानकारी नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत शपथपत्र में नहीं देने के आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था।
उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून 2026 को उनकी याचिका खारिज करते हुए चुनाव याचिका के माध्यम से उचित कानूनी चुनौती देने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम प्रकरण से हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है, इसलिए वे अपना व्यक्तिगत जवाब प्रस्तुत करेंगे।
इस पर कोर्ट ने कहा कि नाम हटाने संबंधी आवेदन पर अलग से आदेश पारित किया जाएगा। याचिका कर्ता मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और अधिवक्ता राजीव मिश्रा ने पैरवी की।
निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ उपस्थित हुए। बहरहाल, अब कोर्ट की ओर से दी गई अंतिम मोहलत के बाद तीनों सांसदों के जवाब पर निगाहें रहेंगी। 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि प्रतिवादियों ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया है या नहीं।
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