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फैमिली कोर्ट में विवाह विच्छेद की याचिका खारिज, कहा-लंबे समय तक अलग रहने मात्र से नहीं होता परित्याग

कोर्ट ने मारपीट जैसे गंभीर आरोपों के समर्थन में मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत अथवा अन्य विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण माना। इन आध...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 07:57:21 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 07:57:21 PM (IST)
फैमिली कोर्ट में विवाह विच्छेद की याचिका खारिज, कहा-लंबे समय तक अलग रहने मात्र से नहीं होता परित्याग
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।

HighLights

  1. मारपीट के आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिले
  2. सहमति से अलग रहने का समझौता भी हुआ था
  3. साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण माना

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मुकेश कुमार दांगी ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल लंबे समय तक अलग रहने मात्र से परित्याग या वैवाहिक क्रूरता सिद्ध नहीं होती। विशेषकर ऐसी स्थिति में, जब पति-पत्नी आपसी सहमति से अलग रहने के लिए समझौता कर चुके हों।

प्रस्तुत विवाह विच्छेद की याचिका खारिज

कोर्ट ने मारपीट जैसे गंभीर आरोपों के समर्थन में मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत अथवा अन्य विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण माना। इन आधारों पर कोर्ट ने पति की ओर से प्रस्तुत विवाह विच्छेद की याचिका खारिज कर दी। अनावेदक पत्नी की ओर से अधिवक्ता राणा भट्टाचार्य ने पक्ष प्रस्तुत किया।


विवाह विच्छेद के लिए याचिका दायर की थी

नई दिल्ली निवासी सुरंजन साहा ने विवाह विच्छेद के लिए याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि उसका विवाह 19 जनवरी, 2001 को अधारताल, जबलपुर निवासी रूम्पा साहा के साथ हुआ था। दोनों की एक पुत्री है। याचिका में पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी वर्ष 2015 से उससे अलग रह रही है और इस प्रकार लंबे समय से अलग रहना वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

मारपीट सहित अन्य आरोप भी लगाए गए

याचिका में पत्नी पर मारपीट सहित अन्य आरोप भी लगाए गए थे। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। कोर्ट ने पाया कि पत्नी के अलग रहने को मात्र इस आधार पर परित्याग नहीं माना जा सकता कि दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं।

प्रस्तुत आधारों को पर्याप्त नहीं माना

विशेष परिस्थितियों में पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से अलग रहने का समझौता भी हुआ था। इसी तरह मारपीट जैसे गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस शिकायत या अन्य विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए पति द्वारा विवाह विच्छेद के लिए प्रस्तुत आधारों को पर्याप्त नहीं माना और याचिका खारिज कर दी।

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