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जबलपुर में 2.20 करोड़ के राशन घोटाले में एफआईआर, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

जांच का अहम पहलू एईपीडीएस पोर्टल पर स्टाक में बदलाव से जुड़ा है। जांच के अनुसार 2022 में अलग-अलग तारीखों पर संबंधित राशन दुकानों का डिजिटल स्टॉक कम कि...और पढ़ें

By Atul ShuklaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 07:58:36 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 07:58:36 PM (IST)
जबलपुर में 2.20 करोड़ के राशन घोटाले में एफआईआर, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
5 सितंबर 2025 को खाद्य विभाग के अधिकारियों सहित कुल 33 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. कलेक्टर और एसपी से भी शिकायत
  2. 11 राशन दुकानों के स्टॉक में मिली थी बड़ी गड़बड़ी
  3. निलंबन और विभागीय कार्रवाई की मांग

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। गरीब परिवारों को बांटे जाने वाले खाद्यान्न में करीब 2.20 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत देकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।

कुल 33 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी

मामला जबलपुर की 11 उचित मूल्य राशन दुकानों में गेहूं, चावल, नमक और शक्कर के स्टाक में कमी से जुड़ा है। 5 सितंबर 2025 को खाद्य विभाग के अधिकारियों सहित कुल 33 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें तत्कालीन जिला आपूर्ति नियंत्रक नुजहत बानो बकाई, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी भावना तिवारी, सुचिता दुबे और डीपीएमयू से जुड़े अक्षय कुमार खरे के नाम शामिल हैं।

करोड़ों की गड़बड़ी

जांच में करीब दो करोड़ 20 लाख 12 हजार 460 रुपये के खाद्यान्न की कमी सामने आई थी। इसमें 391.780 मीट्रिक टन गेहूं, 338.789 मीट्रिक टन चावल, 3.027 मीट्रिक टन नमक और 0.970 मीट्रिक टन शक्कर शामिल थी।

यूजर आईडी और आईपी एड्रेस की भी जांच

तकनीकी जांच में पोर्टल पर इस्तेमाल हुए यूजर आईडी और आईपी एड्रेस की भी जांच की गई थी। इस मामले पर खाद्य मंत्री ने खुद अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की बात कहीं, लेकिन बात पर अब तक अमल नहीं हुआ।


कलेक्टर ने फिर की शिकायत

इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता अधिवक्ता विनोद सिसोदिया ने कलेक्टर और एसपी को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी आर्थिक अनियमितता सामने आने और एफआईआर दर्ज होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर निलंबन अथवा अन्य कार्रवाई नहीं की गई।

इन अधिकारियों को फिर से पदों पर बैठा दिया

शिकायत में मामले की दोबारा उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और सरकारी नुकसान की वसूली की मांग भी की गई है। उनका कहना है कि कार्रवाई तो दूर, इन अधिकारियों को फिर से पदों पर बैठा दिया है।

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