
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने लोकायुक्त के रिश्वत मामले में वन विभाग, सागर के कर्मचारी उमाशंकर कटारे की अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया। न्यायमूर्ति संजीव एस. कलगांवकर की एकलपीठ ने विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर द्वारा 25 अक्टूबर 2018 को सुनाई गई चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा निरस्त कर दी।
मामला वर्ष 2015 का है। शिकायतकर्ता करोड़ीलाल ने आरोप लगाया था कि निर्माणाधीन मकान में इस्तेमाल लकड़ी को लेकर वन अपराध दर्ज नहीं करने के एवज में उमाशंकर रिश्वत मांग रहा है। 20 अक्टूबर 2015 को लोकायुक्त ने जाल बिछाया।
आरोपित के घर के खुले बरामदे में रखे कूलर के ढक्कन के नीचे से राशि बरामद हुई थी। हाई कोर्ट ने पाया कि बातचीत की रिकार्डिंग और प्रतिलिपि में रिश्वत की मांग स्पष्ट नहीं थी। कूलर खुले स्थान पर था और उस पर आरोपित का विशेष नियंत्रण भी साबित नहीं हुआ।
राशि बरामद करने वाले मुख्य पंच साक्षी डा. टोलासिंह को अभियोजन ने गवाह नहीं बनाया। कोर्ट ने कहा कि मांग और स्वीकृति साबित होना आवश्यक है। अभियोजन विफल रहा, इसलिए आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया। अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पैरवी की।
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