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दलितों के सामाजिक बहिष्कार के आरोप पर 21 पर FIR, 19 जून 2024 के समझौते का भी उल्लेख

हाई कोर्ट ने बालाघाट के बिरसा थाना क्षेत्र के झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों के कथित सामाजिक बहिष्कार और जातिगत अत्याचार के मामले में जनहित याच...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 04:23:13 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 04:23:13 PM (IST)
दलितों के सामाजिक बहिष्कार के आरोप पर 21 पर FIR, 19 जून 2024 के समझौते का भी उल्लेख
संबंधित पक्षों के बीच 19 जून 2024 को सामाजिक बहिष्कार समाप्त करने को लेकर समझौता हुआ था।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जनहित याचिका का किया निराकरण
  2. जांच लंबित रखने से कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका
  3. पुलिस जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ ने पाया कि आरोपों को लेकर पुलिस पहले ही 21 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच कर रही है। ऐसे में समान मुद्दे पर जनहित याचिका लंबित रखने से जांच प्रभावित होने की आशंका है।

सार्वजनिक अपमान और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा

याचिका पीपुल्स काउंसिल फार जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स के डायरेक्टर आनंद कुमार बाघमारे ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया गया तथा उन्हें सार्वजनिक अपमान और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा।


एफआइआर दर्ज करके पुलिस की जांच जारी

याचिका में पुलिस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कनक गहरवार ने बताया कि मामले में 21 व्यक्तियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज है और पुलिस जांच जारी है।

पुलिस जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना

कोर्ट के समक्ष यह भी आया कि संबंधित पक्षों के बीच 19 जून 2024 को सामाजिक बहिष्कार समाप्त करने को लेकर समझौता हुआ था। इन परिस्थितियों में युगलपीठ ने पुलिस जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना और जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। आरोपों की वास्तविकता अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।

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