
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ ने पाया कि आरोपों को लेकर पुलिस पहले ही 21 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जांच कर रही है। ऐसे में समान मुद्दे पर जनहित याचिका लंबित रखने से जांच प्रभावित होने की आशंका है।
याचिका पीपुल्स काउंसिल फार जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स के डायरेक्टर आनंद कुमार बाघमारे ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि झामुल गांव में अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया गया तथा उन्हें सार्वजनिक अपमान और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा।
याचिका में पुलिस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कनक गहरवार ने बताया कि मामले में 21 व्यक्तियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज है और पुलिस जांच जारी है।
कोर्ट के समक्ष यह भी आया कि संबंधित पक्षों के बीच 19 जून 2024 को सामाजिक बहिष्कार समाप्त करने को लेकर समझौता हुआ था। इन परिस्थितियों में युगलपीठ ने पुलिस जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना और जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। आरोपों की वास्तविकता अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।