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टी-72 के बाद टी-90 पर ‘निशाना’, 472 करोड़ से बनेगा वाहन निर्माणी जबलपुर में टैंक अपग्रेड हब

जल्द दो नए टी-90 टैंकों को आकार देने की तैयारी पूरी करने की दिशा में काम चल रहा है और 225 इंजीनियर इसकी कमान संभाल रहे हैं। नई सुविधा में हर साल 80 टी...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 06:29:10 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 06:29:10 PM (IST)
टी-72 के बाद टी-90 पर ‘निशाना’, 472 करोड़ से बनेगा वाहन निर्माणी जबलपुर में टैंक अपग्रेड हब
टी-72 टैंक के निचले भाग की ओवरहालिंग का कार्य जारी।

HighLights

  1. ओवरहालिंग से लेकर हाईटेक टेस्टिंग तक बढ़ेगी क्षमता
  2. दो टी-90 तैयार करने की तैयारी, 225 इंजीनियर जुटे
  3. आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक और नया ओवरहालिंग-टेस्टिंग प्लांट

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। वाहन निर्माणी जबलपुर (वीएफजे) अब सिर्फ टी-72 टैंकों की ओवरहालिंग तक सीमित नहीं रहने वाली। टी-72 के सफल परीक्षण और कार्य के बाद निर्माणी ने अब भारतीय सेना के अत्याधुनिक टी-90 मुख्य युद्धक टैंकों की ‘नई जिंदगी’ की तैयारी शुरू कर दी है।

चिन्हित स्थान पर आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक और नया ओवरहालिंग-टेस्टिंग प्लांट

करीब 472 करोड़ रुपये के टी-सीरीज टैंक ओवरहालिंग प्रोजेक्ट के तहत निर्माणी के बाहर चिन्हित स्थान पर आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक और नया ओवरहालिंग-टेस्टिंग प्लांट विकसित किया जा रहा है। लक्ष्य सिर्फ पुराने टैंकों की मरम्मत नहीं, बल्कि उनकी परिचालन क्षमता और सर्विस लाइफ को तकनीक के सहारे बढ़ाना है।


टी-सीरीज टैंक ओवरहालिंग प्रोजेक्ट

क्षमता: इस नई सुविधा के तहत प्रतिवर्ष 80 टी-72 और टी-90 टैंकों की मरम्मत और नवीनीकरण किया जाएगा।

चरणबद्ध योजना: पहले चरण में टी-72 टैंकों पर काम तेज करने के बाद अब टी-90 टैंकों के बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण और ओवरहालिंग की पूरी तैयारी है।

आधुनिक डायग्नोस्टिक्स : इस नई सुविधा में बड़े पैमाने पर नवीनीकरण परियोजनाओं को संभालने के लिए उन्नत डायग्नोस्टिक्स और इंजीनियरिंग टूल्स शामिल किए जा रहे हैं।

प्रोजेक्ट राइनो : सेना अपने लगभग 2,500 से अधिक पुराने हो रहे टी-72 टैंकों के बेड़े की परिचालन अवधि (सर्विस लाइफ) को बढ़ाने के लिए ''''प्रोजेक्ट राइनो'''' और कई आधुनिकीकरण योजनाओं पर काम कर रही है।

1000 एचपी के नए इंजन

टी-72 टैंकों में पुराने 780 एचपी इंजनों को बदलकर 1000 हार्सपावर के नए इंजन लगाए जा रहे हैं, जिनके लिए लैब-स्तरीय मोबिलिटी और हाई-अल्टीट्यूड (ऊंचे पहाड़ी इलाकों) प्रदर्शन की टेस्टिंग की जा रही है। इसी क्षमता के इंजन टी-90 में उपयोग होंगे।

हाई-टेक प्रणालियां

इन टैंकों में नए थर्मल साइट्स, डिजिटल बैलिस्टिक कंप्यूटर, एंटी-ड्रोन सुरक्षा और ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिन्हें कड़े ट्रैक और फील्ड परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

जांच के लिए ट्रैक भी होगा

टैंकों के मेंटेनेंस और रिपेयर के साथ-साथ जांच के लिए आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा। इसके लिए निर्माणी के बाहरी परिसर में स्थान चिहिन्त किया गया है। जल्द ही चिहिन्त स्थान पर ट्रैक को आकार मिलेगा।

संयुक्त प्रयास से सेना को मिलेंगे 230 टैंक

वीएफजे के सहायक जनसंपर्क अधिकारी शैलेंद्र सिंह के अनुसार वाहन निर्माणी के नए प्लांट से हर साल 80 और टैंकों की ओवरहालिंग हो सकेगी, जिससे सेना की आपरेशनल ताकत और अधिक बढ़ेगी। महत्वपूर्ण है कि भारतीय सेना को हर साल लगभग 230 युद्धक टैंकों की ओवरहालिंग की जरूरत होती है। अब तक यह जिम्मेदारी अकेले तमिलनाडु के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री के पास थी, जिसकी क्षमता सालाना 150 टैंकों की थी।

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