
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव और कस्बों में भी डाग बाइट और रेबीज की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं।
इस समस्या के प्रभावी निराकरण के लिए हाई कोर्ट ने एक माॅडल तैयार करने की दिशा में पहल की है। अगली सुनवाई में तय किया जाएगा कि इसके लिए किस शहर का चयन किया जाए।
मंगलवार को आवारा कुत्तों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन में किए गए कार्यों की स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई।
इस पर कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा और याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुराग गोहिल ने ध्यानाकर्षण कराया कि सरकार का ध्यान मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित है, जबकि समस्या गांवों और कस्बों में भी गंभीर रूप ले चुकी है। इसके लिए व्यापक और ठोस कार्ययोजना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सरकारी एवं निजी संस्थानों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक खेल परिसरों और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थानों को चिन्हित कर कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय निकायों को इन स्थानों का नियमित निरीक्षण करने तथा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वहां आवारा कुत्ते डेरा न जमाएं। रेबीज से संक्रमित या संक्रमण की आशंका वाले कुत्तों को शेल्टर होम में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को इस विषय पर स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।
हाई कोर्ट भोपाल में आवारा कुत्ते के हमले में बच्ची के घायल होने की घटना पर स्वत: संज्ञान लेकर पहले से जनहित याचिका के रूप में सुनवाई कर रहा है। इसके अलावा आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर अन्य याचिकाएं भी दायर की गई हैं। मंगलवार को सुनवाई के बाद युगलपीठ ने समस्या के व्यापक समाधान के लिए माडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।
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