
आलोक बैनर्जी, नईदुनिया, जबलपुर। सीमा और दुर्गम मोर्चों पर सेना की बढ़ती जरूरत के बीच गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सेना की मांग में इजाफे के बाद लाइट फील्ड गन (एलएफजी) का आर्डर सीधे दोगुना हो गया है।
पहले 18 तोपों का आर्डर मिला था, जिसे बढ़ाकर अब 36 कर दिया गया है। इसे पिछले नौ वर्षों में एलएफजी का सबसे बड़ा आर्डर बताया जा रहा है। पहले चरण की 18 तोपों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इन्हें आने वाले महीनों में सेना को सौंपे जाने की तैयारी है, जबकि शेष 18 तोपों को अगले वित्तीय वर्ष के उत्पादन लक्ष्य में शामिल किया गया है।
इटारसी स्थित सेंट्रल प्रूफ एस्टेब्लिशमेंट में इसका सफल फायरिंग ट्रायल हो चुका है। मैनुअल एमिंग की जगह इलेक्ट्रानिक कंट्रोल और आटोमैटिक गन अलाइनमेंट जैसी तकनीकें तोप को लक्ष्य के अनुरूप स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाएंगी।
एलएफजी का वजन करीब 2380 किलोग्राम है। यही इसकी बड़ी परिचालन विशेषता है। इसे दो-तीन हिस्सों में खोलकर हेलीकाप्टर के जरिए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है। ट्रक से परिवहन की सुविधा इसे रेगिस्तान से लेकर कठिन युद्ध क्षेत्रों तक तैनाती के लिहाज से उपयोगी बनाती है।
तकनीकी अपग्रेड के साथ इसकी मारक क्षमता भी करीब 17 किलोमीटर से बढ़कर 19 से 21 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है। हाई-स्ट्रेंथ अलाय, आधुनिक फायर-कंट्रोल सिस्टम और उन्नत मशीनिंग तकनीक इसकी क्षमता में इजाफा कर रहे हैं।
उत्पादन प्रक्रिया में पुरानी लेथ मशीनों की जगह सीएनसी और एडवांस्ड कंप्यूटराइज्ड मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। एलएफजी के आधुनिकीकरण में 506 आर्मी बेस वर्कशाप की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे स्वदेशी रक्षा निर्माण और आत्मनिर्भरता की दिशा में जीसीएफ की बढ़ती क्षमता का भी पता चलता है।
यह भी पढ़ें- डिंडौरी जिले में तेज बारिश से बाढ़ जैसे हालात, जबलपुर-अमरकंटक मार्ग बंद; नर्मदा नदी आई उफान पर