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जबलपुर के तोपखाने की ताकत दोगुनी करेगी जीसीएफ, एलएफजी का नौ साल का सबसे बड़ा आर्डर

जीसीएफ अब केवल तोपों की संख्या नहीं बढ़ा रही, बल्कि पुरानी विश्वसनीय 105 मिमी एलएफजी को नई पीढ़ी की डिजिटल तकनीक से ताकतवर बनाने पर भी जोर दे रही है। ...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 06:57:57 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 06:57:57 PM (IST)
जबलपुर के तोपखाने की ताकत दोगुनी करेगी जीसीएफ, एलएफजी का नौ साल का सबसे बड़ा आर्डर
गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर में बनी लाइट फील्ड गन। सौ.इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. 18 से बढ़कर 36 तोपें, डिजिटल तकनीक से बदली ‘हल्की तोप’ की ताकत
  2. ऑटो-लेइंग से निशाना साधना ज्यादा तेज और सटीक, मारक क्षमता 21 किमी तक
  3. हल्की तोप, बड़ा धमाका: एलएफजी में डिजिटल तकनीक की छलांग

आलोक बैनर्जी, नईदुनिया, जबलपुर। सीमा और दुर्गम मोर्चों पर सेना की बढ़ती जरूरत के बीच गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सेना की मांग में इजाफे के बाद लाइट फील्ड गन (एलएफजी) का आर्डर सीधे दोगुना हो गया है।

18 तोपों के आर्डर को बढ़ाकर अब 36 किया

पहले 18 तोपों का आर्डर मिला था, जिसे बढ़ाकर अब 36 कर दिया गया है। इसे पिछले नौ वर्षों में एलएफजी का सबसे बड़ा आर्डर बताया जा रहा है। पहले चरण की 18 तोपों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इन्हें आने वाले महीनों में सेना को सौंपे जाने की तैयारी है, जबकि शेष 18 तोपों को अगले वित्तीय वर्ष के उत्पादन लक्ष्य में शामिल किया गया है।


इटारसी में सफल फायरिंग ट्रायल हो चुका है

इटारसी स्थित सेंट्रल प्रूफ एस्टेब्लिशमेंट में इसका सफल फायरिंग ट्रायल हो चुका है। मैनुअल एमिंग की जगह इलेक्ट्रानिक कंट्रोल और आटोमैटिक गन अलाइनमेंट जैसी तकनीकें तोप को लक्ष्य के अनुरूप स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाएंगी।

2380 किलो की ‘हल्की’ ताकत

एलएफजी का वजन करीब 2380 किलोग्राम है। यही इसकी बड़ी परिचालन विशेषता है। इसे दो-तीन हिस्सों में खोलकर हेलीकाप्टर के जरिए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है। ट्रक से परिवहन की सुविधा इसे रेगिस्तान से लेकर कठिन युद्ध क्षेत्रों तक तैनाती के लिहाज से उपयोगी बनाती है।

17 से बढ़कर 21 किमी तक मार

तकनीकी अपग्रेड के साथ इसकी मारक क्षमता भी करीब 17 किलोमीटर से बढ़कर 19 से 21 किलोमीटर तक पहुंचने की उम्मीद है। हाई-स्ट्रेंथ अलाय, आधुनिक फायर-कंट्रोल सिस्टम और उन्नत मशीनिंग तकनीक इसकी क्षमता में इजाफा कर रहे हैं।

पुरानी लेथ मशीनों की जगह सीएनसी का इस्तेमाल बढ़ा

उत्पादन प्रक्रिया में पुरानी लेथ मशीनों की जगह सीएनसी और एडवांस्ड कंप्यूटराइज्ड मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। एलएफजी के आधुनिकीकरण में 506 आर्मी बेस वर्कशाप की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे स्वदेशी रक्षा निर्माण और आत्मनिर्भरता की दिशा में जीसीएफ की बढ़ती क्षमता का भी पता चलता है।

एक नजर में....

  • 36 एलएफजी का नया आर्डर, नौ साल में सबसे बड़ा।
  • 18 से बढ़कर 36 तोपों के उत्पादन का लक्ष्य।
  • 105 मिमी एलएफजी का डिजिटल अपग्रेड।
  • 17 से बढ़कर 21 किमी तक मारक क्षमता।
  • 2380 किलोग्राम है एलएफजी का वजन।
  • 506 आर्मी बेस वर्कशाप की आधुनिकीकरण में भूमिका।
  • आटो-लेइंग तकनीक का सफल फायरिंग ट्रायल।
  • हेलीकाप्टर से दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने में सक्षम।
  • सीएनसी मशीनों से उत्पादन में तकनीकी बदलाव।

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