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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई आज

समर्थन में दायर याचिकाओं पर विगत सुनवाई में ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया गया था कि प्रदेश में लगभग 51 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद लंबे समय तक अन्य पिछड़ा ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 09:55:56 AM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 11:48:17 AM (IST)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई आज
दायर याचिकाओं पर विगत सुनवाई में ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया।

HighLights

  1. सरकार स्पष्ट नहीं कर सकी कि प्रतिशत किस आधार पर निर्धारित किया
  2. कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान
  3. ओबीसी आरक्षण का व्यापक विरोध हुआ और इसे कोर्ट में चुनौती दी गई

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में आज सुनवाई होगी। सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत किस संवैधानिक, सामाजिक और प्रशासनिक आधार पर निर्धारित किया गया। बहस पूरी नहीं हो सकी।

पिछड़ा वर्ग को केवल 14 प्रतिशत आरक्षण

प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाओं पर विगत सुनवाई में ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया गया था कि प्रदेश में लगभग 51 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद लंबे समय तक अन्य पिछड़ा वर्ग को केवल 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।


सुनवाई आज दोपहर 2:30 बजे नियत कर दी गई थी

न्यायमूर्ति विनय सराफ की आगामी तिथियों पर अनुपलब्धता के कारण अगली सुनवाई 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे नियत कर दी गई थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने दलील दी थी

एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने दलील दी थी कि अनुसूचित जाति की आबादी 15.6 प्रतिशत होने पर 16 प्रतिशत तथा अनुसूचित जनजाति की आबादी 21.01 प्रतिशत होने पर 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान

वहीं सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान है। इसके विपरीत लगभग 51 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी वर्ग को वर्षों तक केवल 14 प्रतिशत आरक्षण मिला।

ओबीसी आरक्षण का व्यापक विरोध हुआ और इसे कोर्ट में चुनौती दी गई

उनका कहना था कि जब सरकार ने इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया तो केवल ओबीसी आरक्षण का व्यापक विरोध हुआ और इसे कोर्ट में चुनौती दी गई।

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