हाई कोर्ट ने कहा- भूमि अधिग्रहण की वीडियोग्राफी कर तीन साल तक सुरक्षित रखें, NHAI के प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर माफी स्वीकार की
हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन पर अतिक्रमण बताकर निर्माण हटाने की कार्रवाई करने के मामले में एनएचएआई को महत्वपूर्ण ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 02:45:37 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 02:46:42 PM (IST)
HighLights
- पत्र में खसरा नंबर नहीं बताने पर जताई नाराजगी
- नोटिफिकेशन छह मई 2026 को जारी किया गया था
- मुआवजे का चेक भी हो गया था डिसआनर
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन पर अतिक्रमण बताकर निर्माण हटाने की कार्रवाई करने के मामले में एनएचएआई को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की पूरी वीडियोग्राफी कराई जाए और रिकॉर्डिंग को तीन वर्ष तक सुरक्षित रखा जाए।
वहीं पूर्व आदेश के उल्लंघन को लेकर न्यायिक अवमानना की स्थिति बनने पर व्यक्तिगत रूप से तलब किए गए एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप पाटीदार ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी, जिसे युगलपीठ ने स्वीकार कर लिया।
नोटिफिकेशन छह मई 2026 को जारी किया गया था
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ के समक्ष छतरपुर निवासी सुमन नायक एवं उज्ज्वल नायक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में बताया गया कि एनएच-34 के निर्माण व चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण का नोटिफिकेशन छह मई 2026 को जारी किया गया था।
अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही याचिकाकर्ताओं को अतिक्रमणकारी बताते हुए निर्माण हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस में जमीन का अधिग्रहण पहले ही हो जाने का उल्लेख था, जबकि याचिकाकर्ताओं को मुआवजा नहीं मिला था।
मुआवजे का चेक भी हो गया था डिसआनर
याचिकाकर्ताओं की भूमि के एक हिस्से के मुआवजे के लिए एक्सिस बैंक का चेक जारी किया गया था, लेकिन बैंक आफ महाराष्ट्र के मेमो के जरिए उक्त चेक डिसआनर हो गया। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने इस स्थिति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए पूछा था कि यदि एनएचएआई के पास पैसे नहीं हैं तो वह सड़कें क्यों बना रहा है। कोर्ट ने इस संबंध में एनएचएआई से हलफनामा भी मांगा था।
पत्र में खसरा नंबर नहीं बताने पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का एक पत्र कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। इसमें यह कहा गया था कि हाई कोर्ट ने किस जमीन के संबंध में आदेश जारी किया है, इसका उल्लेख नहीं है। युगलपीठ ने पाया कि पूर्व में भूमि अधिग्रहण के संबंध में याचिकाकर्ताओं को जारी पत्र में संबंधित जमीन के खसरा नंबर का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।
कोर्ट ने माना कि प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर की ओर से की गई कार्रवाई पूर्व में जारी अंतरिम आदेश का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होती है और उनके विरुद्ध न्यायिक अवमानना के तत्व मौजूद हैं। इसी आधार पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए थे।
माफी स्वीकार, मुआवजा देने की जानकारी
मंगलवार को हुई सुनवाई में प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप पाटीदार व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट में उपस्थित हुए और बिना शर्त माफी मांगी। उनकी ओर से बताया गया कि पूर्व में किए गए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा याचिकाकर्ताओं को प्रदान कर दिया गया है।
युगलपीठ ने माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही का निराकरण कर दिया और भूमि से संबंधित कार्रवाई की वीडियोग्राफी कर उसे तीन वर्ष तक सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अतुल चौधरी ने पैरवी की।