
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के नर्सिंग कालेजों में मान्यता और संचालन संबंधी अनियमितताओं से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने अपात्र काॅलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता और मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल को एक-दूसरे के प्रस्ताव व आपत्तियां साझा कर समन्वय के साथ नया शिफ्टिंग माड्यूल तैयार करने कहा है।
इसे अगली सुनवाई पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी। ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान काउंसिल ने अपात्र काॅलेजों के विद्यार्थियों के स्थानांतरण और डबल शिफ्ट में प्रशिक्षण को लेकर स्टेटस रिपोर्ट तथा शिफ्टिंग माड्यूल प्रस्तुत किया।
इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने आपत्तियां दर्ज कराईं। याचिकाकर्ता पक्ष ने माड्यूल में प्रशिक्षण की पारदर्शिता, विद्यार्थियों की पसंद, बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षण की लागत जैसे व्यावहारिक मुद्दे उठाए।
यह मांग भी की गई कि विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई का खर्च अपात्र कालेजों की बैंक गारंटी राजसात कर वसूला जाए तथा स्थानांतरण प्रक्रिया में विद्यार्थियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को प्रस्तावों और आपत्तियों पर समन्वय कर संशोधित माड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई, शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लीनिकल प्रशिक्षण प्रभावित न हों। साथ ही दोषी संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नर्सिंग काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।
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