
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
बुधवार को कलेक्टर व्यक्तिगत रूप से न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुईं और माफी मांगते हुए न्यायालय को बताया कि आदेश का पालन कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विद्या प्रसाद ने पैरवी की। सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिजवी की ओर से दायर अवमानना याचिका में बताया गया कि वह पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर के पद पर कार्यरत थीं। नियमितीकरण सहित अन्य वेतन लाभ दिए जाने की मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
13 अगस्त 2025 को हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए उनके अभ्यावेदन का 90 दिनों में निराकरण करने के निर्देश दिए थे।
आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि अवमानना याचिका पर चार दिसंबर 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद कलेक्टर की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई और न ही आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
कलेक्टर ने पांच अक्टूबर 2025 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस प्राप्त होने की जानकारी दी थी तथा कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को मामले में संपर्क अधिकारी नियुक्त किया था। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
एकलपीठ ने परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर उषा परमार की उपस्थिति सुनिश्चित करने और आदेश का पालन कराने के लिए गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। वारंट की तामील की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक, पन्ना को सौंपी गई थी।
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