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राघवदेवाचार्य के अभ्यावेदन पर हाई कोर्ट का आदेश, धमकी के मामले में एसपी जबलपुर 45 दिन में निर्णय लें

वाट्सऐप और फेसबुक पर अपमानजनक पोस्ट भी डाली गईं। इस संबंध में मदनमहल थाने में 11 अप्रैल 2025 को अपराध दर्ज किया गया था।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 01:03:32 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 01:03:32 PM (IST)
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राघवदेवाचार्य के अभ्यावेदन पर हाई कोर्ट का आदेश, धमकी के मामले में एसपी जबलपुर 45 दिन में निर्णय लें

HighLights

  1. देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी थे नाराज
  2. जान से मारने की धमकी का भी लगाया था आरोप
  3. दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर भी दिया जाए

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट ने हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और स्वयं को सर धड़ से जुदा करने की धमकी मिलने के मामले में पुलिस अधीक्षक, जबलपुर को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

लंबित अभ्यावेदनों का निराकरण विधि अनुसार

न्यायमूिर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने एसपी को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत दोनों लंबित अभ्यावेदनों का निराकरण विधि अनुसार 45 दिन के भीतर करें। इस दौरान दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर भी दिया जाए।

राघवदेवाचार्य की ओर से दायर की गई थी याचिका

याचिका जगतगुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघवदेवाचार्य की ओर से दायर की गई थी। अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने पक्ष रखा। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पांडे उपस्थित हुए।

ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांगें की थी

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि 11 अप्रैल 2025 को मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं के संबंध में कथित आपत्तिजनक पोस्ट प्रसारित की जा रही थीं। इस पर उन्होंने ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की थी।

धड़ से अलग करने सहित अन्य धमकियां दीं

आरोप है कि इसके बाद उन्हें सर धड़ से अलग करने सहित अन्य धमकियां दी गईं। साथ ही वाट्सऐप और फेसबुक पर अपमानजनक पोस्ट भी डाली गईं। इस संबंध में मदनमहल थाने में 11 अप्रैल 2025 को अपराध दर्ज किया गया था।


आरोपितों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं

याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रकरण में करीब 20 लोगों को आरोपित बनाया गया था। इनमें से तीन की गिरफ्तारी हुई और वे बाद में जमानत पर रिहा हो गए, जबकि शेष आरोपितों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

निराकरण नहीं होने पर हाई कोर्ट की शरण ली

याचिकाकर्ता ने इस संबंध में 25 अगस्त 2025 और एक सितंबर 2026 को पुलिस अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किए थे। इनका निराकरण नहीं होने पर हाई कोर्ट की शरण ली गई।

याचिकाकर्ता को निर्णय की सूचना भी दी जाए

हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि दोनों लंबित अभ्यावेदनों पर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान कर विधि अनुसार निर्णय लें। प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 45 दिन के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर याचिकाकर्ता को निर्णय की सूचना भी दी जाए।

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