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एमबीबीएस छात्र एक अंक से फेल, हाई कोर्ट का इनकार; कहा कि विश्वविद्यालय को नहीं दे सकते निर्देश

छात्र का कहना था कि वह केवल एक अंक से अनुत्तीर्ण हुआ है। यदि उसे एक अंक मिल जाए तो उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष बच सकता है और वह द्वितीय व्यावसायिक पाठ्यक्...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 07:52:57 PM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 07:52:57 PM (IST)
एमबीबीएस छात्र एक अंक से फेल, हाई कोर्ट का इनकार; कहा कि विश्वविद्यालय को नहीं दे सकते निर्देश

HighLights

  1. राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नियमों में प्रविधान नहीं
  2. विश्वविद्यालय को एक अंक देने का निर्देश नहीं दे स‍कते
  3. शरीर रचना विज्ञान विषय में एक अंक से अनुत्तीर्ण है छात्र

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पूरक परीक्षा में शरीर रचना विज्ञान विषय में एक अंक से अनुत्तीर्ण छात्र को अनुग्रह अंक देने से इनकार कर दिया।

नियमों में अनुग्रह अंक देने का कोई प्रविधान नहीं

न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने ग्वालियर के गजरा राजा चिकित्सा महाविद्यालय के छात्र राम नरेश कुशवाहा की याचिका निरस्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नियमों में अनुग्रह अंक देने का कोई प्रविधान नहीं है। ऐसे में विश्वविद्यालय को नियमों के विपरीत छात्र को एक अंक देने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

पुनर्मूल्यांकन व एक अनुग्रह अंक देने की मांग की थी

याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के विरुद्ध याचिका दायर कर शरीर रचना विज्ञान की उत्तरपुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन व एक अनुग्रह अंक देने की मांग की थी।

प्रोफेसर ने एक अंक देने की सिफारिश की थी

छात्र ने अपनी मांग के समर्थन में भोपाल के एक अन्य चिकित्सा महाविद्यालय के प्रोफेसर की राय भी प्रस्तुत की थी। प्रोफेसर ने एक अंक दिए जाने की सिफारिश की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य महाविद्यालय के शिक्षक की व्यक्तिगत राय के आधार पर अनुग्रह अंक देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।


विश्वविद्यालय से अधिवक्ता नीरज सिंह चौहान ने पक्ष रखा

मामले में राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित व आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता नीरज सिंह चौहान ने पक्ष रखा। युगलपीठ ने कहा कि जब राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के नियमों में अनुग्रह अंक देने की व्यवस्था नहीं है, तो कोर्ट विश्वविद्यालय को ऐसा करने का निर्देश नहीं दे सकती।

शैक्षणिक वर्ष बचाने का आधार नियमों के अभाव में राहत

केवल एक अंक की कमी और शैक्षणिक वर्ष बचाने का आधार नियमों के अभाव में राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस आधार पर याचिका को सारहीन पाते हुए निरस्त कर दिया गया।

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