
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बीमा प्रीमियम की राशि अधिकृत एजेंट द्वारा हड़प लिए जाने के आधार पर बीमा कंपनी मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। हाई कोर्ट ने रीवा के सड़क हादसे से जुड़े मामले में यह महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए इंडसइंड मार्केटिंग एंड फाइनेंशियल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की अपील निरस्त कर दी।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि अधिकृत एजेंट ने ग्राहक से प्रीमियम वसूलने के बाद उसका गबन किया है तो इसका दायित्व कंपनी पर रहेगा। एजेंट की धोखाधड़ी को आधार बनाकर पीड़ित को बीमा क्लेम से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला 29 जून 2019 का है। रीवा में सुबह करीब 8:30 बजे तेज रफ्तार हाइवा की टक्कर से 15 वर्षीय शनी बंसल की मृत्यु हो गई थी। दुर्घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए दावा प्रस्तुत किया। अधिकरण ने 22 अक्टूबर 2024 को मुआवजा देने का आदेश पारित किया था।
आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी के शाखा प्रबंधक की ओर से हाई कोर्ट में अपील दायर की गई थी। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि ग्राहकों से बीमा प्रीमियम वसूलने वाले प्रतिनिधि ने कई ग्राहकों की राशि का गबन कर लिया और उसे कंपनी के पास जमा नहीं किया। इसलिए कंपनी को बीमा क्लेम का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। एकलपीठ ने प्रतिनिधिक दायित्व के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकृत एजेंट अपने कार्य के दौरान धोखाधड़ी करता है तो उसके कृत्य के लिए संबंधित संस्था जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
एजेंट द्वारा प्रीमियम की राशि का गबन किया जाना बीमा कंपनी को क्लेम भुगतान के दायित्व से मुक्त करने का आधार नहीं है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के आदेश को बरकरार रखते हुए कंपनी की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष को निर्धारित मुआवजे का भुगतान करने का रास्ता साफ हो गया।