
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की आउटसोर्स जनशक्ति उपलब्ध कराने संबंधी निविदा में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए 25 प्रतिशत खरीद आरक्षित रखने के प्रविधान को लेकर प्रतिवादियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने प्रतिवादियों को निर्देश प्राप्त करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता मेसर्स अदिति इलेक्ट्रिकल की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह सेंगर ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ता की शिकायत है कि मध्य प्रदेश भंडार खरीद एवं सेवा खरीद नियम, 2015 तथा एमएसई के लिए सार्वजनिक खरीद नीति आदेश, 2012 के तहत वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। मामला एमपीपीकेवीवीसीएल द्वारा जारी निविदा से जुड़ा है।
इसके तहत कंपनी के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों सहित नौ सर्किलों में विभिन्न संचालन एवं रखरखाव कार्यों के लिए आउटसोर्स जनशक्ति उपलब्ध कराने वाली सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन किया जाना है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के लाइफकेयर इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले में दिए गए 2025 के निर्णय का हवाला दिया। उसमें एमएसई से 25 प्रतिशत खरीद के प्रविधान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव उपस्थित रहे।
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