• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

MP हाईकोर्ट का सख्त रुख : 'मानव-वन्यजीव संघर्ष' पर SC आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में बनाई जा रही नीति की स्टेटस रिपोर्ट प...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Tue, 25 Nov 2025 04:46:33 AM (IST)Updated Date: Tue, 25 Nov 2025 06:52:50 AM (IST)
MP हाईकोर्ट का सख्त रुख : 'मानव-वन्यजीव संघर्ष' पर SC आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट मांगी
MP हाईकोर्ट का सख्त रुख

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में बनाई जा रही नीति की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य शासन को चार सप्ताह का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद जनहित याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार किया जाएगा। सोमवार को हुई सुनवाई में किसानों द्वारा हाई-वोल्टेज तार लगाने से वन्य प्राणियों की मौतें होने का बिंदु भी रेखांकित हुआ।

जनहित याचिकाकर्ता रायपुर निवासी नितिन संघवी की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाथियों को रेस्क्यू के नाम पर लंबे समय तक कैद में रखने का रवैया बेहद चिंताजनक है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन इसकी भरपाई की प्रक्रिया बेहद धीमी है। मुआवजा पटवारी स्तर पर तय होता है और इसे सामान्य प्राकृतिक आपदा जैसा माना जाता है। राहत मिलने में काफी समय लगता है। आंकड़ों के अनुसार किसानों को सिर्फ 17 प्रतिशत तक ही मुआवजा मिल पाता है। फसल और संपत्ति के नुकसान का मामला वन विभाग संभाले। पटवारी के बजाय वन विभाग को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए।


मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए

सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर, 2025 को सभी राज्यों को टीएन गोदावर्मन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में यह निर्देश दिए थे कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को उत्तर प्रदेश और केरल की तर्ज पर प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा जाए। ऐसे मामलों में मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए और छह महीने के भीतर विस्तृत नीति बनाई जाए।

प्रदेश में बाघों की मौत का कारण करंट

विगत सुनवाई में एक्सपर्ट कमेटी ने बताया था कि कान्हा में रखे गए जंगली हाथियों को 15 दिनों में छोड़ दिया जाएगा और उनकी ट्रैकिंग के लिए रेडियो कॉलर आईडी मंगवाई गई है। आज की सुनवाई में बताया गया कि दो हाथियों को कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया है। इसी देरी और परेशानियों के कारण किसान खेतों की सुरक्षा के लिए हाई टेंशन करंट वाले तार लगाने लगते हैं। इसके कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत करंट लगने से हो रही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बाघों की मौत के मामलों में करंट एक बड़ा कारण है।

इसे भी पढ़ें- खाद खरीदने आए किसान की कार का कांच तोड़कर बदमाश 2.70 लाख रुपये ले भागे, वारदात सीसीटीवी में कैद