• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

रिश्वत लेने के आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार, हाई कोर्ट ने कहा- राशि स्वीकार करने के विश्वसनीय प्रमाण जरूरी

राजधानी भोपाल निवासी सवाईराम गुर्जर ने अपने खेत में पांच हार्स पावर की मोटर के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था।

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 07:26:53 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 07:26:53 PM (IST)
रिश्वत लेने के आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार, हाई कोर्ट ने कहा- राशि स्वीकार करने के विश्वसनीय प्रमाण जरूरी
साक्ष्यों से यह संभावना भी सामने आई कि संबंधित राशि बिजली कनेक्शन की आधिकारिक फीस के रूप में दी गई थी। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने खारिज की लोकायुक्त की अपील
  2. निजी ठेकेदार के माध्यम से संविदा श्रमिक था
  3. लोकायुक्त ने जाल बिछाकर कार्रवाई की

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट ने हरदा जिले में बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर 11 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने के मामले में आरोपी धर्मेंद्र सांखला की दोषमुक्ति बरकरार रखी है।

लोकायुक्त की अपील को भी स्वीकार करने से इनकार

न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर की एकलपीठ ने शिकायतकर्ता सवाईराम गुर्जर की अपील खारिज कर दी। वहीं, लोकायुक्त की अपील को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

स्थायी बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था

राजधानी भोपाल निवासी सवाईराम गुर्जर ने अपने खेत में पांच हार्स पावर की मोटर के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था।

लाइनमैन और सब-इंजीनियर ने रिश्वत की मांग की थी

अभियोजन का आरोप था कि बिजली विभाग में कार्यरत लाइनमैन धर्मेंद्र सांखला और सब-इंजीनियर घनश्याम तिवारी ने कनेक्शन दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

पाउडर लगे 11 हजार रुपये बरामद किए

शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। इस दौरान धर्मेंद्र के पास से पाउडर लगे 11 हजार रुपये के नोट बरामद किए गए। उसके हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाने पर घोल गुलाबी हो गया था।

मांग और स्वीकारोक्ति के प्रमाण नहीं मिले

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग और राशि को रिश्वत के रूप में स्वीकार किए जाने की बात विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। बातचीत के साक्ष्यों से यह संभावना भी सामने आई कि संबंधित राशि बिजली कनेक्शन की आधिकारिक फीस के रूप में दी गई थी।


आरोपी निजी ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त संविदा श्रमिक था

एकलपीठ ने यह भी पाया कि आरोपी एक निजी ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त संविदा श्रमिक था और उसके पास बिजली कनेक्शन स्वीकृत करने या उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं था।

केवल नोटों की बरामदगी पर्याप्त नहीं

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिश्वत के लिए चिह्नित नोटों की बरामदगी मात्र दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती। इसके लिए रिश्वत की मांग और राशि को रिश्वत के रूप में स्वीकार किए जाने के विश्वसनीय प्रमाण आवश्यक हैं। इन्हीं आधारों पर एकलपीठ ने जिला न्यायालय के दोषमुक्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

यह भी पढ़ें- जबलपुर मेडिकल काॅलेज में पति की मौत के बाद अंग निकालकर बेचे, अज्ञात बताकर दफनाने का दावा