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हाई कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर लगाई रोक, तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- भेदभाव बर्दाश्त नहीं

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकाले जाने पर रोक लगा दी।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 21 Apr 2026 04:34:09 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Apr 2026 04:34:09 PM (IST)
हाई कोर्ट ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर लगाई रोक, तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- भेदभाव बर्दाश्त नहीं
विशेष बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होगा बर्दाश्त।

HighLights

  1. विशेष बच्चों के साथ भेदभाव नहीं होगा बर्दाश्त
  2. हाईकोर्ट ने सरकार और स्कूलों से मांगी रिपोर्ट
  3. विशेष शिक्षकों की नियुक्ति पर भी दागे सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकाले जाने पर रोक लगा दी। इस अंतरिम आदेश के साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी, जबलपुर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। यही नहीं जबलपुर के विभिन्न स्कूलों में अध्ययनरत दिव्यांग यानी विशेष बच्चों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दे दिए। मामला जबलपुर विजडम वैली व जीडी गोयनका स्कूल से संबंधित है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को नियत की है।

भेदभाव पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि दिव्यांग बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव अनुचित है। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी सौरभ सुबैया की ओर से अधिवक्ता शिवेंद्र पांडे ने पक्ष रखा।


विशेष शिक्षकों की कमी और कानून का उल्लंघन

उन्होंने दलील दी कि जबलपुर में लगभग 50 शासकीय और 200 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें काफी संख्या में दिव्यांग बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से कई न तो बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। इसके बावजूद स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। बावजूद इसके कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के अंतर्गत यह किया जाना अनिवार्य है।

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मौलिक अधिकारों के संरक्षण की मांग

इस तरह कानून का सुचित पालन नदारद होना चिंताजनक है। इस बीच दिव्यांग बच्चों को स्कूलों से बाहर किए जाने का रवैया उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसीलिए हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है। मुख्य मांग यही है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर ठोस अंकुश सुनिश्चित किया जाए। साथ ही समावेशी शिक्षा को मजबूत आधार देने समुचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।