
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (एनटीसीए) से जवाब तलब किया है। न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने टाइगर रिजर्व में बाघों को संक्रमण से बचाने के लिए किए जा रहे वैक्सीनेशन, वन्यजीव चिकित्सा व्यवस्था तथा रिक्त पदों की स्थिति की जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी बताने को कहा है कि पिछले 10 वर्षों में मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण के लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई गई। एनटीसीए को भी प्रदेश के टाइगर रिजर्व के लिए जारी राशि का वर्षवार ब्योरा प्रस्तुत करना है। हाई कोर्ट ने इससे पहले 19 अगस्त की सुनवाई में एनटीसीए को दस वर्ष का फंड संबंधी डाटा पेश करने के निर्देश दिए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान टाइगर रिजर्व में संक्रमण की रोकथाम का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विशेषकर कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) की आशंका के बीच बाघों की मौत के बाद कुत्तों के वैक्सीनेशन और रोग निगरानी को महत्वपूर्ण माना गया।
एनटीसीए ने भी टाइगर रिजर्व और उसके आसपास कुत्तों के नियमित टीकाकरण तथा वन्यजीवों की स्वास्थ्य निगरानी मजबूत करने की सलाह दी है। याचिका में बाघों की मौत रोकने के लिए वैज्ञानिक निगरानी, रोग नियंत्रण और एनटीसीए के निर्धारित प्रोटोकाल के पालन का मुद्दा उठाया गया है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल-मई 2026 के दौरान कई बाघों की मौत के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा था। याचिका में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के पालन तथा बाघों की मौत रोकने के लिए किए गए निवारक और उपचारात्मक उपायों की जानकारी मांगी गई थी। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को निर्धारित की है।
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