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जबलपुर में EHT बिजली लाइनों के नीचे निर्माण की अनुमति पर हाई कोर्ट सख्त, 10 अधिकारियों को नोटिस

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन लाइनों के नीचे और निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित है, इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा मकान, पार्...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 05:45:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 05:45:04 PM (IST)
जबलपुर में EHT बिजली लाइनों के नीचे निर्माण की अनुमति पर हाई कोर्ट सख्त, 10 अधिकारियों को नोटिस
220 और 133 केवी लाइनों के नीचे निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. 220 और 133 केवी लाइनों के नीचे निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त
  2. अति उच्चदाब लाइनों के पास कॉलोनियों के विकास पर याचिका
  3. लाइनों के पास अवैध निर्माण पर सरकार समेत 10 को नोटिस

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर शहर में अति उच्चदाब बिजली लाइनों के आसपास निर्माण और कॉलोनियों के विकास का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे एवं न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने ग्रीष्म जैन एवं अमित पटेल की याचिका पर राज्य शासन सहित संबंधित विभागों के 10 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।

नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा एवं लावण्या वर्मा ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि जबलपुर शहर की सीमाओं से होकर अति उच्चदाब (ईएचटी) बिजली लाइनें गुजरती हैं। इन लाइनों के माध्यम से 220 और 133 किलोवाट नहीं, बल्कि 220 और 133 किलोवोल्ट की विद्युत आपूर्ति की जाती है।


याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन लाइनों के नीचे और निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित है, इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा मकान, पार्क और अन्य निर्माण कार्यों की अनुमति दी जा रही है। इससे नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

जिला दंडाधिकारी को सूचना के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप

याचिका के अनुसार, मुख्य अभियंता, एमपी ट्रांसको के ईएचटी मेंटेनेंस विभाग द्वारा इस संबंध में जिला दंडाधिकारी जबलपुर को जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद कथित रूप से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शहर में कई स्थानों पर अति उच्चदाब लाइनों के नजदीक अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं, जो भूमि विकास नियम, 2012 और विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

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याचिका में यह भी कहा गया कि उच्चदाब लाइनों के आसपास पूर्व में दुर्घटनाएं और जनहानि हो चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा शिकायतों और लिखित सूचनाओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। याचिकाकर्ताओं ने नियोजित शहरी विकास को नागरिकों का अधिकार बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।

इन अधिकारियों को नोटिस

कोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग; अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगरीय विकास व आवास विभाग; एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता (ईएचटी मेंटेनेंस); जिला दंडाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, जबलपुर; संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किए हैं। मामले में अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।