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अब होटल, अस्पताल; मैरिज गार्डन को स्वत: करना होगा अपने कचरे का निपटान

सभी होटल, अस्पताल, उद्योग, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मल्टी, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक व अन्य संस्थान जिनका एरिया 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक है और वहां प...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 09:25:45 AM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 09:25:45 AM (IST)
अब होटल, अस्पताल; मैरिज गार्डन को स्वत: करना होगा अपने कचरे का निपटान
कार्यशाला में मंच को संबोधित करते हुए महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू मंंचासीन कलेक्टर निगमाध्यक्ष, निगमायुक्त, एवं अन्य। नईदुनिया

HighLights

  1. ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ में मापदंड
  2. सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
  3. लापरवाही पर जुर्माने का भी प्रविधान

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने के लिए नगर निगम कचरे प्रबंधन तो कर ही रहा है, लेकिन अब शहर के बड़े होटल, अस्पताल मैरिज गार्डन जैसे अन्य संस्थानों को भी अपने कचरे का स्वत: निष्पादन करना होगा।

थिएटर में आयोजित कार्यशाला में दी जानकारी

ये जानकारी शुक्रवार को नगर निगम द्वारा ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ विषय पर भंवरताल स्थित संस्कृति थिएटर में आयोजित कार्यशाला में दी गई।

बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) व्यवस्था लागू

दरअसल स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक विज्ञानिक एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देश में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ लागू हो गया है। इस नियम के तहत शहर में अब ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (बीडब्ल्यूजी) व्यवस्था लागू की जा रही है।


पावर प्रेजेंटेशन से दी जानकारी, 150 से ज्यादा संचालक हुए शामिल

कार्यशाला में होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, मैरिज गार्डन का संचालन करने वाले करीब 150 संचालक व प्रतिनिधि शामिल हुए। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने सभी को इस नई व्यवस्था से अवगत कराया।

नए नियमों के तहत कई सख्त और महत्वपूर्ण प्रविधान

पावर प्रेजेंटेशन के जरिये उन्हें बताया कि ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ लागू हो गया है। पोर्टल पर कैसे पंजीयन कराएं। ये भी बताया कि नए नियमों के तहत कई सख्त और महत्वपूर्ण प्रविधान किए गए हैं।इस अवसर पर निगमाध्यक्ष रिंकूज विज, एमआइसी सदस्य रामसोनकर, डा सुभाष तिवारी मंचासीन रहे।

पंजीयन कराना जरूरी

कार्यशाला में शामिल होटल, अस्पताल और मैरिज गार्डन संचालकों को बताया गया कि ऐसे सभी बड़े संस्थानों को बीडब्ल्यूजी यानि बल्क वेस्ट जनरेट पोर्टल में पंजीयन करना होगा और कचरे का विज्ञानिक तरीके से निष्पादन कराने का प्रमाण पत्र भी लेना होगा।

गलत जानकारी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा

खासबात ये है कि यदि इसमें लापरवाही की या गलत जानकारी दी तो संस्थान पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस दौरान संचालकों को केंद्रीय पोर्टल पर पंजीयन करने की जानकारी भी साझा की गई।

शहर को बनाना है गार्बेज फ्री सिटी: महापौर

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ को लेकर कहा कि नए नियम के तहत जहां प्रतिदिन 40 हजारर लीटर या अधिक पानी की खपत होती है ऐसे संस्थानों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाना होगा। शहर ठोस अवशिष्ट प्रबंधन में पहले से अग्रणी है।

कचरा निष्पादन क्षमता का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित

कठौंदा में 900 टन कचरा निष्पादन क्षमता का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित है। प्लांट की मदद से कचरे से बिजली बनाई जाती है। देश भर में ऐसे दो ही प्लांट है। कचरा निष्पादन के नए नियम पर सभी मिलकर काम करेंगे ताकि शहर गार्बेज फ्री सिटी बन सके।

हर 15 दिन में भेजनी होगी अनुपालन रिपोर्ट: निगमायुक्त

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन संचालकों से नियमों का पालन करने की अपील की। होटल संचालकों से कहा कि स्वच्छता के मानकों को ध्यान में रखते हुए पाउच आयटम, पालीथिन, प्लास्टिक निर्मित सामग्री का उपयोग बंद करें।

निगरानी एवं प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके

पानी का उपयोग कम करें। नए नियमों के तहत इसकी भी निगरानी होगी। न्यायालय ने जिला कलेक्टरों को पाक्षिक अनुपालन रिपोर्ट तैयार करने और उन्हें नामित राज्य अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया, ताकि अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यान्वयन में निरंतर निगरानी एवं प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

बड़े प्रतिष्ठान बल्क वेस्ट जनरेटर: निगमायुक्त

निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ के तहत जो संस्थान बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करते हैं, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर माना गया है। इसके अंतरगत जिनका निर्मित क्षेत्र 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक है।

सीधे नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकते कचरा

जहां प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक पानी की खपत होती है, जहां रोज 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता है। इन सभी बड़े जनरेटरों को अपने गीले कचरे का निपटारा खुद अपने परिसर में या किसी अधिकृत एजेंसी के माध्यम से करना होगा। इसे सीधे नगर निगम के भरोसे नहीं छोड़ सकते।

कचरे का चार श्रेणियों में निष्पादन जरूरी

कचरे का चार श्रेणियों में बंटवारा अनिवार्य है। गीला कचरा - रसोई का कचरा, बचा हुआ भोजन, फल-सब्जियों के छिलके, सूखा कचरा - प्लास्टिक, कागज, कांच, धातु आदि, सैनिटरी कचरा - डायपर, सैनिटरी नैपकिन आदि, विशेष देखभाल वाला कचरा - पुरानी बैटरियां, बल्ब, एक्सपायर्ड दवाइयां और ई-वेस्ट आदि।

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