
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश कर शहर तक पहुंचे एक बांग्लादेशी दंपती को दो वर्ष का कारावास पूरा होने के बाद डिपोर्ट कर दिया गया है। सिविल लाइंस पुलिस ने दोनों को कोलकाता तक सुरक्षित पहुंचाया, जहां उन्हें बीसीएफ के हवाले किया गया। इसके बाद बीसीएफ ने दोनों नागरिकों को बांग्लादेश भेजने की आगे की प्रक्रिया पूरी की।
डिपोर्ट किए गए बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान मोहम्मद मौसूर और उसकी पत्नी मीनारा बेगम के रूप में हुई है। दोनों को मार्च 2023 में जबलपुर से पकड़ा गया था। दंपती गोरखपुर मैदान क्षेत्र में रह रहे थे और भिक्षावृत्ति कर जीवनयापन कर रहे थे। उनके हुलिए और भाषा में अंतर पाए जाने पर पुलिस को संदेह हुआ। जांच के दौरान उनके पास भारतीय नागरिकता से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में दंपती ने बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने और गुजरात होते हुए जबलपुर पहुंचकर रहने की जानकारी दी थी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ विदेश अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया। निचली अदालत द्वारा दिए गए निर्णय को बाद में उच्च न्यायालय ने संशोधित करते हुए दोनों को चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
दो वर्ष का कारावास पूरा करने के बाद गत माह दंपती को केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया। सजा पूरी होने की सूचना जेल प्रशासन द्वारा जिला पुलिस को दी गई। इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस ने मुख्यालय और विदेश मंत्रालय से समन्वय कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू की।
रिहाई के बाद मोहम्मद मौसूर को सिविल लाइंस थाने में और उसकी पत्नी मीनारा बेगम को महिला सुधार गृह में रखा गया। डिपोर्ट की अनुमति मिलने पर पुलिस ने दोनों को गत माह सुरक्षा के बीच कोलकाता पहुंचाया, जहां से बीसीएफ के माध्यम से उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने दंपती के डिपोर्ट किए जाने की पुष्टि की है।
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