
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिला सहकारिता विभाग में पदस्थ वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद सामने आया है।
शिकायत में सामने आया है कि इन्होंने अनुसूचित जनजाति वर्ग का कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी ली और इस आधार पर पदोन्नति का लाभ ले लिया। मुख्य सचिव और सहकारिता आयुक्त को शिकायत की, जिसके बाद जांच शुरू हो गई है।
सूत्रों की मानें तो जांच में शिकायत सही पाई गई है। हालांकि रिपोर्ट को अभी जारी नहीं किया गया है। इधर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिकायत सही है, लेकिन कार्रवाई क्या होगी, इस पर भोपाल से ही निर्णय लिया जाएगा।
शिकायत में दावा किया गया है कि वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक हेमलता डोंगर (हिडाऊ) के पिता नेमाजी हिडाऊ ने वर्ष 1960 में हल्बा अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर एमपीईबी में नौकरी हासिल की थी।
छिंदवाड़ा कलेक्टर की जांच में उनकी जाति कोष्टी, अन्य पिछड़ा वर्ग की बताई गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी पृष्ठभूमि के बावजूद उनकी बेटी ने अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र हासिल कर सहकारिता विभाग में नियुक्ति प्राप्त की।
शिकायत के अनुसार, सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में छिंदवाड़ा और जबलपुर के संबंधित कार्यालयों में हेमलता डोंगर के नाम से जाति प्रमाण पत्र जारी होने की प्रविष्टि नहीं मिलने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने वर्ष 1989 में छिंदवाड़ा से प्रमाण पत्र जारी होने और वर्ष 1998 में जबलपुर के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से नया प्रमाण पत्र बनवाने संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए हैं।
संबंधित कर्मचारी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी लेने और पदौन्नति पाने की शिकायत सामने आई है। इसकी जांच भोपाल स्तर पर छानबीन समिति कर रही है।
राकेश पांडे, जेआरसीएस, सहकारिता विभाग, जबलपुर
शिकायत है, उसकी जांच छानबीन समिति कर रही है। जो भी जांच के बाद सामने आ जाएगा।
हेमलता डोंगर (हिडाऊ), वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक
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