
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब संगठनात्मक विस्तार के साथ स्वयंसेवकों के आचरण और सामाजिक व्यवहार को अपनी कार्यपद्धति का प्रमुख आधार बनाने पर जोर दे रहा है।
सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत के तीन दिवसीय जबलपुर प्रवास के अंतिम दिन सोमवार को श्रीराम इंजीनियरिंग काॅलेज में हुई प्रांत कार्यकारिणी और विभाग टोली की बैठक में विचारों को व्यवहार में उतारने, संगठनात्मक विकेंद्रीकरण और नई जिम्मेदारियां सौंपने पर मंथन हुआ।
महाकौशल प्रांत को रीवा, सागर और जबलपुर संभाग में विभाजित कर बनाई गई नई संभागीय रचना के तहत नवंबर के बाद दायित्व सौंपे जाने हैं। बैठक में इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने और संगठन को निचले स्तर तक मजबूत करने पर चर्चा हुई।
प्रांत कार्यकारिणी के 36 और विभाग टोली के करीब 43 पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। अखिल भारतीय अधिकारियों और क्षेत्र प्रचारक की मौजूदगी में हिंदू सम्मेलनों में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के विषय पर भी विचार किया गया। इसके साथ सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों से जुड़े पंचपरिवर्तन को परिवार और समाज के बीच व्यवहार में उतारने की जरूरत रेखांकित की गई।
महाकौशल प्रांत की संगठनात्मक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए रीवा, सागर और जबलपुर संभागों में विभाजित किया गया है। इस संभागीय रचना के तहत नवंबर के बाद संबंधित क्षेत्रों में दायित्व सौंपने की तैयारी है।
बैठक में नई व्यवस्था के क्रियान्वयन, कार्यों के विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। हिंदू सम्मेलनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने के विषय पर भी चर्चा की गई। उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करना और उनकी पहुंच बढ़ाना है।
बैठक में इस बात पर जोर रहा कि संघ के विचार केवल बैठकों, भाषणों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। स्वयंसेवकों का व्यक्तिगत आचरण, अनुशासन, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी उनके व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए।
डाॅ. भागवत ने दो दिन पहले कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम में भी इसी दृष्टिकोण को रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि संघ की पहचान उसके स्वयंसेवकों से होती है और उनका व्यवहार ही समाज को संघ के बारे में बताता है। संघ से जुड़ने का उद्देश्य कुछ पाने के बजाय समाज को देने का भाव होना चाहिए।
बैठक में पंचपरिवर्तन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर भी चर्चा हुई। सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे विषयों को परिवार और समाज के स्तर पर आगे बढ़ाने में स्वयंसेवकों की भूमिका पर विचार किया गया। बैठक में अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते, क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डाॅ. प्रदीप दुबे और प्रांत कार्यवाह उत्तम बैनर्जी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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