
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर में पर्यटन स्थलों तक पहुंचना और घूमने के बाद शहर लौटना अब पहले की तुलना में आसान हो रहा है। नगर निगम की एसी बसें सार्वजनिक परिवहन के सुविधाजनक विकल्प के रूप में लोगों के काम आ रही हैं।
इन बसों से पर्यटक शहर के विभिन्न हिस्सों से आवागमन कर रहे हैं। ठंड के मौसम में भी एसी बसों में सफर आरामदायक बना हुआ है।
खासकर परिवार के साथ घूमने जाने वाले लोगों को इससे सहूलियत मिल रही है। शाम तक पर्यटन स्थलों पर समय बिताने के बाद शहर लौटने के लिए सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलने से निजी वाहन की अनिवार्यता भी कम हुई है।
शहर में भेड़ाघाट, धुआंधार जलप्रपात, डुमना नेचर रिजर्व और मदन महल जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल लोगों को आकर्षित करते हैं। इन स्थानों पर घूमने जाने वाले लोगों के लिए आवागमन की सुविधा महत्वपूर्ण होती है।
नगर निगम की पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसें इस जरूरत को पूरा करने में मदद कर रही हैं। हाल ही में भेड़ाघाट में आयोजित नर्मदा महोत्सव के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने एसी बसों से आवागमन किया। इससे सार्वजनिक परिवहन की उपयोगिता सामने आई।
पर्यटन स्थलों पर छुट्टियों और विशेष आयोजनों के दौरान निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग की समस्या और यातायात का दबाव बढ़ जाता है। बसों से पहुंचने वाले लोगों को अपने वाहन खड़े करने की जगह तलाशने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे सफर की परेशानी कम होती है।
बस में सफर करने वाले विजय दुबे बताते हैं कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग उन लोगों के लिए भी उपयोगी है, जिनके पास निजी वाहन नहीं हैं या जो भीड़भाड़ वाले रास्तों पर खुद वाहन चलाने से बचना चाहते हैं।
पर्यटन स्थलों पर घूमने के दौरान शाम हो जाना आम बात है। ऐसे में शहर लौटने के लिए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होना जरूरी है। नगर निगम की बसें इस जरूरत के लिहाज से उपयोगी साबित हो रही हैं। इससे लोगों को पर्यटन के बाद वापसी की योजना बनाने में सहूलियत मिलती है।
रात में सफर की सुविधा बसों के निर्धारित मार्ग और समय पर निर्भर करती है। इसलिए यात्रियों के लिए समय-सारिणी की जानकारी उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है। इस बार नर्मदा महोत्सव में लोगों ने ई बस में सफर करने पर जोर दिया। करीब 500 से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया।
सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहतर होने से जबलपुर के पर्यटन स्थलों तक पहुंचने का विकल्प अधिक सुविधाजनक बन रहा है। एसी बसों में सफर से परिवारों, बुजुर्गों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को लाभ मिलता है। निजी वाहनों की जगह बसों का उपयोग बढ़ने से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
बस परिवहन से जुड़े लोग बताते हैं कि पर्यटन स्थलों तक आवागमन आसान होने का असर पर्यटन अनुभव पर भी पड़ता है। जब लोगों को आने-जाने के लिए सुविधाजनक साधन मिलता है, तो वे बिना वाहन चलाने और पार्किंग की चिंता किए घूमने का आनंद ले सकते हैं। नगर निगम की बसें शहर में पर्यटन और सार्वजनिक परिवहन के बीच बेहतर जुड़ाव का माध्यम बन रही हैं।
ई बस में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बस का सफर सुरक्षित होने के साथ अब और सुविधाजनक हो गया है। इस समय करीब 45 ई बस संचालित हो रही हैं और लगभग 55 ई बसें और आना बाकी है।
सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल
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