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जबलपुर इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्रों का नवाचार, अब नहीं जाएगी भूमिगत खदान में फंसे श्रमिकों की जान

खदान के भीतर जहरीली गैसों की मौजूदगी, तापमान में बदलाव और अंदरूनी रास्तों की स्थिति के कारण राहत एवं बचाव दल के लिए सीधे प्रवेश करना कई बार जोखिम भरा ...और पढ़ें

By Deepti MuleyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 05:52:09 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 05:52:09 PM (IST)
जबलपुर इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्रों का नवाचार, अब नहीं जाएगी भूमिगत खदान में फंसे श्रमिकों की जान
नवाचार दिखाते जबलपुर इंजीनियरिंग कालेज के छात्र-छात्राएं। सौजन्‍य कॉलेज

HighLights

  1. सुरक्षित रास्ते की मैपिंग में मिलेगी मदद
  2. जहरीली गैस और तापमान की करेगा निगरानी
  3. भूमिगत खदान तक पहुंचेगा माइन रेस्क्यू रोवर

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भूमिगत कोयला खदानों में दुर्घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती फंसे हुए श्रमिकों तक सुरक्षित और जल्द पहुंचना होती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए जबलपुर इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्रों ने ‘माइन रेस्क्यू रोवर’ विकसित किया है।

सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद करेगा

यह रोवर खदान के अंदर जाकर वहां की पर्यावरणीय परिस्थितियों की जानकारी जुटाने के साथ ही बचाव दल को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण विशेषता सुरक्षित मार्ग की मैपिंग है

छात्रों ने ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रोवर की परिकल्पना की है, जहां किसी हादसे के बाद खदान के भीतर जाना मानव जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। प्रोजेक्ट की एक महत्वपूर्ण विशेषता सुरक्षित मार्ग की मैपिंग है।


खदान के अंदर की स्थिति का आकलन करेगा

यदि खदान के अंदर श्रमिक फंसे हैं तो उनके स्थान तक पहुंचने के लिए सही रास्ते का पता लगाना जरूरी होता है। रोवर खदान के अंदर की स्थिति का आकलन करते हुए सुरक्षित मार्ग की मैपिंग करने में सक्षम है।

सुरक्षित मार्ग की जानकारी विशेष रूप से उपयोगी

बचाव दल को संभावित रास्ते की जानकारी मिल सकती है और वे उसी के आधार पर आगे की रणनीति तैयार कर सकते हैं। सुरक्षित मार्ग की जानकारी विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है।

बचाव दल को निर्णय लेने में सहायता करेगा

जब दुर्घटना के बाद खदान के अंदर सामान्य रास्ते अवरुद्ध हो गए हों या किसी क्षेत्र में जाना जोखिमपूर्ण हो। रोवर को पहले भेजकर रास्ते और वातावरण की जानकारी हासिल करने से बचाव दल को निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।

पहले रोवर जाएगा, फिर बचाव दल

  • माइन रेस्क्यू रोवर का प्रमुख उद्देश्य खदान के अंदर की स्थिति का प्रारंभिक आकलन करना है।
  • दुर्घटना या आपात स्थिति में रोवर को खदान के भीतर भेजकर जानकारी एकत्र की जा सकती है।
  • बचाव दल को यह समझने में सहायता मिल सकती है कि अंदर की परिस्थितियां कितनी सुरक्षित हैं।
  • रोवर में लगाए गए विभिन्न सेंसर खदान के वातावरण की निगरानी करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • इनमें विशेष रूप से विषैली गैसों और तापमान की निगरानी की व्यवस्था की गई है।
  • भूमिगत खदानों में गैसों का स्तर और तापमान बचाव अभियान के दौरान महत्वपूर्ण कारक होते हैं।
  • रोवर से मिलने वाली जानकारी बचाव दल को अंदर की परिस्थितियों का आकलन करने में उपयोगी हो सकती है।

जहरीली गैसों की निगरानी से बढ़ेगी सुरक्षा

भूमिगत खदानों में अलग-अलग प्रकार की गैसों की मौजूदगी बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। किसी दुर्घटना के बाद बिना पर्याप्त जानकारी के अंदर प्रवेश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा

माइन रेस्क्यू रोवर में लगाए गए सेंसर इसी तरह की परिस्थितियों की निगरानी के लिए उपयोग किए गए हैं। रोवर के जरिए खदान के अंदर के वातावरण की जानकारी जुटाने से बचाव दल को संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।

बचाव अभियान की योजना बनाने में उपयोगी

तापमान में असामान्य बदलाव की जानकारी भी बचाव अभियान की योजना बनाने में उपयोगी हो सकती है। इस तरह रोवर का उद्देश्य सीधे मानव प्रवेश से पहले खदान के अंदर की परिस्थितियों को समझने में मदद करना है।

तकनीक के जरिए चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान में सहायता

भूमिगत खदान में बचाव अभियान कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण होता है। एक ओर फंसे श्रमिकों तक जल्द पहुंचना जरूरी होता है, वहीं दूसरी ओर बचाव दल की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है।

रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल

ऐसे में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल मानव जीवन को सीधे जोखिम में डाले बिना प्रारंभिक जानकारी जुटाने का माध्यम बन सकता है। काॅलेज के छात्रों द्वारा तैयार किया गया यह रोवर इसी सोच पर आधारित है।

सुरक्षित मार्ग की पहचान में सहायता

इसका उपयोग खदान के अंदर जाकर वहां के पर्यावरण, तापमान और संभावित जोखिमों की जानकारी लेने तथा सुरक्षित मार्ग की पहचान में सहायता के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से बचाव दल को खदान के अंदर की स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।

छात्रों के लिए प्रयोगात्मक सीख का भी माध्यम

इसमें छात्रों ने इंजीनियरिंग की विभिन्न तकनीकों को एक वास्तविक समस्या से जोड़ने का प्रयास किया है। रोवर तैयार करने के दौरान सेंसर आधारित निगरानी, रोबोटिक सिस्टम, पर्यावरणीय जानकारी जुटाने और मार्ग की मैपिंग जैसी तकनीकों को एक साथ उपयोग किया गया है।

जीवन की चुनौतियों के समाधान की दिशा में उपयोग

छात्रों का यह प्रोजेक्ट यह भी दर्शाता है कि इंजीनियरिंग संस्थानों में तैयार किए जा रहे माडल केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान की दिशा में उपयोग किए जा सकते हैं। माइन रेस्क्यू रोवर के जरिए छात्रों ने खदानों में होने वाली आपात स्थितियों में तकनीक की संभावित भूमिका को सामने रखा है।

सुरक्षित मार्ग तलाशने में सहायता देना है मुख्य फोकस

नवाचार में अरुण आदित्य डे, नेहल जैन, गुरलीन कौर गुजराल, पर्व राहंगडाले, परांगत काटकर और ध्रुव घुराटिया की टीम ने काम किया है। प्रो. अभिलाष कुमार पटेल के मार्गदर्शन में तैयार इस परियोजना का मुख्य फोकस भूमिगत खदान में बचाव कार्य के दौरान आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और बचाव दल को सुरक्षित मार्ग तलाशने में सहायता देना है।

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