
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में बनी धनुष तोप का क्रेज बढ़ा है। इसका असर अब उत्पादन लक्ष्य पर दिखाई दे रहा है।
खास बात यह है कि धनुष अब सिर्फ संख्या में नहीं बढ़ेगी, बल्कि इसकी भूमिका भी बदलेगी। 95 फीसदी कलपुर्जों के स्वदेशीकरण के साथ यह पूरी तरह माउंटेन गन के रूप में तैयार होगी और पुरानी टोड गनों की जगह लेगी।
धनुष को भारतीय सेना की पहली 155 मिलीमीटर, 45 कैलिबर की उन्नत स्वदेशी हावित्जर तोप माना जाता है और इसे ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है।
करीब 38 किलोमीटर है धनुष की मौजूदा मारक क्षमता, जिसे अपग्रेड कर 44 किलोमीटर से अधिक करने की तैयारी है। 1980 के दशक की बोफोर्स तोप पर आधारित डिजाइन वाली धनुष एक मिनट में करीब छह राउंड फायर कर सकती है।
निर्माणी महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि आयुध क्षेत्र में शानदार उत्पादन के लिए सेना के लिए नई धनुष तैयार करने चर्चा अंतिम दौर में है और इसे जल्दी ही हरी झंडी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पांच वर्षों में यह खेप चरणबद्ध तरीके से सेना के बेड़े में शामिल होगी।
इसके माउंटेन गन संस्करण को ट्रक से स्वचालित तरीके से ले जाया जा सकेगा, जबकि टोड गन के लिए भारी सैन्य ट्रक या आर्टिलरी ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है।
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