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ऑपरेशन सिंदूर के बाद जबलपुर में बनी देसी बोफोर्स का क्रेज, 300 धनुष तोप बनाएगी जीसीएफ

जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) को भारतीय सेना से 300 धनुष तोप तैयार करने का लक्ष्य मिलने जा रहा है। जीसीएफ ने 2012 में इस तोप पर काम शुरू किया थ...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 05:06:06 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 05:06:06 PM (IST)
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जबलपुर में बनी देसी बोफोर्स का क्रेज, 300 धनुष तोप बनाएगी जीसीएफ
इसके माउंटेन गन संस्करण को ट्रक से स्वचालित तरीके से ले जाया जा सकेगा। प्रतीकात्‍मक चित्र

HighLights

  1. अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य
  2. 95 प्रतिशत कलपुर्जे स्वदेशी
  3. माउंटेन गन के रूप में होगी तैनाती

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में बनी धनुष तोप का क्रेज बढ़ा है। इसका असर अब उत्पादन लक्ष्य पर दिखाई दे रहा है।

95 फीसदी कलपुर्जों के स्वदेशीकरण के साथ

खास बात यह है कि धनुष अब सिर्फ संख्या में नहीं बढ़ेगी, बल्कि इसकी भूमिका भी बदलेगी। 95 फीसदी कलपुर्जों के स्वदेशीकरण के साथ यह पूरी तरह माउंटेन गन के रूप में तैयार होगी और पुरानी टोड गनों की जगह लेगी।

धनुष भारतीय सेना की पहली उन्नत स्वदेशी हावित्जर तोप

धनुष को भारतीय सेना की पहली 155 मिलीमीटर, 45 कैलिबर की उन्नत स्वदेशी हावित्जर तोप माना जाता है और इसे ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है।

धनुष की मौजूदा मारक क्षमता

करीब 38 किलोमीटर है धनुष की मौजूदा मारक क्षमता, जिसे अपग्रेड कर 44 किलोमीटर से अधिक करने की तैयारी है। 1980 के दशक की बोफोर्स तोप पर आधारित डिजाइन वाली धनुष एक मिनट में करीब छह राउंड फायर कर सकती है।


निर्माणी महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि आयुध क्षेत्र में शानदार उत्पादन के लिए सेना के लिए नई धनुष तैयार करने चर्चा अंतिम दौर में है और इसे जल्दी ही हरी झंडी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पांच वर्षों में यह खेप चरणबद्ध तरीके से सेना के बेड़े में शामिल होगी।

ट्रक से स्वचालित तरीके से ले जाया जा सकेगा

इसके माउंटेन गन संस्करण को ट्रक से स्वचालित तरीके से ले जाया जा सकेगा, जबकि टोड गन के लिए भारी सैन्य ट्रक या आर्टिलरी ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद धनुष तोप की मांग बढ़ी।
  • पांच साल में चरणबद्ध तरीके से सेना को मिलेंगी 300 तोपें।
  • 13 साल में स्वदेशी कलपुर्जों की हिस्सेदारी 21 से बढ़कर 95 प्रतिशत।
  • 38 किमी की मारक क्षमता, 44 किमी से अधिक करने की तैयारी।
  • एक मिनट में करीब छह राउंड फायर करने में सक्षम।

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