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राजभवन के दस्तावेजों का पहले निरीक्षण फिर प्रमाणित प्रति, 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण व्यवस्था

आवेदक निरीक्षण के बाद आवश्यक दस्तावेजों को चिन्हांकित कर उनकी प्रतियों के लिए आवेदन कर सकेगा। निरीक्षण के बाद आवश्यक दस्तावेजों को चिन्हांकित कर उनकी प्रमाणित प्रतियां मांग सकेगा।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 11:05:25 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 11:05:25 AM (IST)
राजभवन के दस्तावेजों का पहले निरीक्षण फिर प्रमाणित प्रति, 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण व्यवस्था
आवेदक की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार चंद ने पक्ष रखा, जबकि शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने आरटीआई के 15 साल पुराने मामले में एकलपीठ के आदेश में किया संशोधन
  2. राज्यपाल की केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्टों और केंद्रीय पत्राचार की मांगी गई थी जानकारी
  3. लोक सूचना अधिकारी ने 29 दिसंबर 2011 को आवेदन अस्पष्ट बताते हुए निरस्त कर दिया था

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश राजभवन से राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली मासिक रिपोर्टों और केंद्रीय पत्राचार की जानकारी हासिल करने की 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

आवश्यक दस्तावेजों को चिन्हांकित होगा पहले

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने से पहले उनका निरीक्षण किया जा सकेगा। आवेदक निरीक्षण के बाद आवश्यक दस्तावेजों को चिन्हांकित कर उनकी प्रतियों के लिए आवेदन कर सकेगा।

लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था

भोपाल निवासी अजय दुबे ने 12 दिसंबर 2011 को राजभवन सचिवालय के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था।

राजभवन को भेजे गए पत्रों और निर्देशों की जानकारी मांगी गई थी

एक जनवरी 2011 के बाद राज्यपाल द्वारा प्रदेश के शासन-प्रशासन और राजनीतिक स्थिति के संबंध में भारत सरकार को भेजी गई मासिक रिपोर्टों तथा इनके आधार पर केंद्र सरकार द्वारा राजभवन को भेजे गए पत्रों और निर्देशों की जानकारी मांगी गई थी।


आवेदन अस्पष्ट बता निरस्त कर दिया था

लोक सूचना अधिकारी ने 29 दिसंबर 2011 को आवेदन अस्पष्ट बताते हुए निरस्त कर दिया था। हालांकि, प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 23 फरवरी 2012 को अभिलेखों के निरीक्षण और उसके बाद आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां मांगने की अनुमति दी थी।

15 दिन में नया आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी थी

मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा, जिसने 17 अगस्त 2015 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश को प्रभावी बनाए रखा। इसके विरुद्ध रिट याचिक दायर हुई। एकलपीठ ने 17 अगस्त 2026 को आयोग और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश निरस्त करते हुए आवेदक को दस्तावेजों का स्पष्ट विवरण देकर 15 दिन में नया आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी थी।

इस आदेश के विरुद्ध अजय दुबे ने रिट अपील दायर की

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने दो नवंबर 2026 को पारित आदेश में एकलपीठ के निर्देश में संशोधन किया। कोर्ट ने कहा कि आवेदक पहले लोक सूचना अधिकारी के समक्ष अभिलेखों के निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकता है।

दस्तावेजों को चिन्हांकित कर उनकी प्रमाणित प्रतियां मांगगा।

निरीक्षण के बाद आवश्यक दस्तावेजों को चिन्हांकित कर उनकी प्रमाणित प्रतियां मांग सकेगा। आवेदक की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार चंद ने पक्ष रखा, जबकि शासन की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए। इस आदेश से 15 साल पुराने मामले में अभिलेखों के निरीक्षण और वांछित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने का रास्ता स्पष्ट हो गया है।

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