• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

नलों से गंदा पानी आने का मामला MP हाई कोर्ट पहुंचा, चिंता जताई कि कहीं जबलपुर भी इंदौर न बन जाए

जनहित याचिका के साथ नईदुनिया आदि समाचार पत्रों की कतरनों को संलग्न किया गया है। ये समाचार 2019 से 2026 तक की खबरों से संबंधित हैं। सवाल खड़ा किया गया ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 06 Jan 2026 07:10:10 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Jan 2026 07:20:21 PM (IST)
नलों से गंदा पानी आने का मामला MP हाई कोर्ट पहुंचा, चिंता जताई कि कहीं जबलपुर भी इंदौर न बन जाए
मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट।

HighLights

  1. जबलपुर निवासी अधिवक्ता की जनहित याचिका
  2. चिंता यही कि कहीं जबलपुर भी इंदौर न बन जाए
  3. 2019 से शुरू किया था शिकायत का सिलसिला

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए जबलपुरनिवासियों के घरों तक नलों से संक्रमित गंदे पानी की आपूर्ति को कठघरे में रखा गया है। मामले में नगर निगम, जबलपुर के आयुक्त, महापौर, कलेक्टर, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को पक्षकार बनाया गया है। जनहित याचिका की शीघ्र सुनवाई पर बल दिया गया है।

जनहित याचिकाकर्ता तुलसी नगर, जबलपुर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव की ओर से अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता पैरवी करेंगे। उन्होंने अवगत कराया कि जनहित याचिकाकर्ता डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम का अध्यक्ष है। वह 2019 से अपने इलाके में नल से गंदे पानी की आपूर्ति पर सवाल खड़ा करता आ रहा है।


इसके बावजूद शिकायत का अब तक समाधान नदारद है। इस वजह से चेरीताल और जयप्रकाश नगर के वाशिंदे हलकान हैं। आलम यह है कि कभी तो समुचित पेयजल आपूर्ति ही नहीं होती और जब होती भी है तो साफ-सुथरे पानी के स्थान पर मटमैला यानि नालों से रिसकर संक्रमित हुआ पानी नलों की टोंटी से बाहर निकलता है। जिसे छानकर या उबालकर पीने की मजबूरी है। इसके बावजूद घरों में बीमार पड़ने वालों की संख्या बढ़ती रहती है।

बारिश के समय स्थिति हो जाती है विकराल

अधिवक्ता रवींद्र गुप्ता ने बताया कि जनहित याचिका में यह तथ्य रेखांकित किया गया है कि बारिश के दौरान नलों से बहुत बदबूदार और गंदा आता है। ऐसा इसलिए क्याेंकि जगह-जगह पानी की लाइन नालियों और नालों से गुजरी हैं, जिनमें लीकेज है, जिसे ठीक नहीं किया जाता। 2019 के बाद 2020 में भी इस समस्या की शिकायत की गई किंतु नगर निगम की कुंभकर्णी निद्रा जस की तस रही।

अखबारों की कतरनों को संलग्न किया

जनहित याचिका के साथ नईदुनिया आदि समाचार पत्रों की कतरनों को संलग्न किया गया है। ये समाचार 2019 से 2026 तक की खबरों से संबंधित हैं। सवाल खड़ा किया गया है कि जब प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया समय-समय पर सचेतक की भूमिका में सामने आते रहे हैं, तो फिर स्थानीय स्वशासन नगर निगम नींद से क्यों नहीं जाग रहा। विगत छह वर्ष में कई लोग बीमार हुए। पेट के संक्रमण सामने आए।

फिल्टर प्लांट बंद पड़े, पानी की गुणवत्ता नापने का कोई विधिवत मापदंड नहीं

जनहित याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्टर प्लांट बंद पड़े, पानी की गुणवत्ता नापने का कोई विधिवत मापदंड नहीं हैं। जबलपुर की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। अस्पताल गंदे पानी से होने वाले संक्रमण की वजह से मरीजों से भरे पड़े हैं पर कोई सुनवाई नहीं है। हाल ही में गांव निगड़ी में 60 लोग बीमार पड़े थे। चूंकि मामला गंभीर प्रकृति का है अत: हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद- 21 के अंतर्गत जनता को मिले जीवन की रक्षा के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करे, इसी मांग के साथ हाई कोर्ट आए हैं।

हाई कोर्ट उच्च स्तरीय कमेटी गठित करे

जनहित याचिका में कहा गया है कि जबलपुर में 79 वार्ड हैं परंतु इन वार्डो में कहीं कोई स्वास्थ्य अधिकारी या किसी अन्य अधिकारी को शिकायत की कोई व्यवस्था नहीं है। आज भी जबलपुर में नगर निगम द्वारा ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कोई पोर्टल नहीं है, कोई मोबाइल पर हेल्पलाइन नहीं है, जिसमें जनता के द्वारा सूचना प्रदान करने पर गंदे पानी की सप्लाई की समस्या को 24 घंटे के अंदर निर्मूल की जा सके। करोड़ों रुपये का बजट बनाया जाता है और यह राशि कहां खर्च होती है कोई अता-पता नहीं है। अतः संपूर्ण मामले पर हाई कोर्ट उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दे। हाई कोर्ट की निगरानी में समस्या को हल किए जाने की व्यवस्था दी जाए।