
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरेला मार्ग पर रोड डिवाइडर की ग्रिल लगाने और रंगाई का काम कर रहे श्रमिक आधे दिन परिश्रम के बाद थके हुए थे। वे चैन से भोजन करने के लिए एक साथ बैठे थे। वे दो-तीन निवाले भी नहीं खा सके थे कि तेज भाग रही लग्जरी कार उनकी मौत बनकर आयी। कुछ देर पहले तक जिस जगह पर बैठकर श्रमिक आपस में संवाद करते हुए इत्मीनान से भोजन कर रहे थे, वहां कुछ ही सेकेंड बाद मातम पसर गया।
मंडला-रायपुर जाने वाले इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का शोर थम गया। कुछ श्रमिक चीख-पुकार मचा रहे थे। घायल दर्द से कराह रहे थे। दुर्घटना में बाल-बाल बचे अन्य श्रमिक घायल साथियों को उठाने का प्रयास कर रहे थे। घटना के बाद सड़क पर कतार से घायल पड़े श्रमिकों को देखकर राहगीर भी ठिठक गए। वहीं, गंभीर चोट से कराहने के बावजूद घायल श्रमिक अपने अन्य साथियों की खैरियत पूछते रहे। अस्पताल पहुंचने पर भी सामने नहीं दिख रहे साथियों का नाम लेकर बार-बार उनके बारे में पूछते रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि साफ जगह देखकर श्रमिक सड़क के किनारे खाना खाने के लिए बैठे। वे डिवाइडर के पास ही किनारे में बैठकर खाना खा रहे थे। तभी दोपहर को लगभग दो बजे लग्जरी कार तेज गति से आई। श्रमिक कुछ समझ पाते या संभल पाते, उससे पहले कार सबको टक्कर मारते हुए निकल गई। अपने साथियों को बचाने का भी श्रमिकों को मौका नहीं मिला।
कार की टक्कर लगने से लच्छो बाई और चैनवती बाई छिटक कर दूर गिरी। सिर में गंभीर चोट लगने दोनों की मौत हुई। कार की टक्कर के साथ छिटक-कर कुछ श्रमिक रोड डिवाइडर की लोहे की ग्रिल से टकरा गए। जिसके कारण उन्हें ज्यादा चोट आयी। गंभीर घायल मेडिकल अस्पताल में भर्ती है। कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बरेला हादसे पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने घटना की जानकारी लगते ही कलेक्टर और एनएचएआइ के अधिकारी से बात की और घायलों के इलाज की व्यवस्था की जानकारी ली। एनएचएआइ ने प्रारंभिक रूप से मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया है। जिसमें से एक-एक लाख रुपये तत्काल स्वीकृत कर दिए गए हैं। सिंह ने कहा कि सरकार घायलों के इलाज की पूरी चिंता करेगी और एनएचएआइ द्वारा आगे भी आवश्यक सहयोग किया जाएगा।