
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। स्वामित्व योजना के तहत लंबित रजिस्ट्रियों को पूरा करने के लिए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पटवारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब प्रत्येक पटवारी को प्रतिदिन कम से कम 20 रजिस्ट्रियां करनी होंगी।
जिले में रोजाना एक हजार रजिस्ट्रियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कलेक्टर ने योजना के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि स्वामित्व योजना में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना है।
सभी पटवारी अपने क्षेत्र में रजिस्ट्री कार्य को प्राथमिकता से पूरा करें। जिस पटवारी के क्षेत्र में रजिस्ट्रियों का काम पूरा हो जाता है, उसे दूसरे हलके में स्थानांतरित करने के बजाय प्रोत्साहित किया जाए, ताकि दूसरे पटवारियों को भी बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा मिले।
उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वर की गति बेहतर रहने के दौरान रजिस्ट्री के काम को प्राथमिकता दी जाए, जिससे अधिक से अधिक हितग्राहियों की रजिस्ट्रियां पूरी की जा सकें। समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की स्थिति भी जानी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी आमजन की समस्याओं को गंभीरता से समझें और निर्धारित समयसीमा में उनका समाधान सुनिश्चित करें। सभी अधिकारी अपने पदीय दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का समय पर निराकरण हो सके।
कलेक्टर ने दिए निर्देशनईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। स्वामित्व योजना के तहत अधूरे पंजीयन को पूरा कराने के लिए अब उन गांवों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां 75 से 80 प्रतिशत तक रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। ऐसे गांवों में विशेष कैंप लगाकर शेष पंजीयन पूरे कराए जाएंगे।
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पटवारियों को सत्यापन कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए, ताकि पंजीयन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। कलेक्टर ने कहा कि जिन गांवों में अधिकांश पंजीयन हो चुके हैं, वहां शेष हितग्राहियों को चिह्नित कर प्रक्रिया पूरी कराई जाए।
सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने लंबित शिकायतों के निराकरण में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों और तहसीलदारों से कहा कि शिकायतों को केवल फोर्स क्लोज करने के बजाय शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का वास्तविक समाधान कराएं। जिन मामलों में नीतिगत कारणों से निराकरण संभव नहीं है, उन्हीं में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निराकरण में गुणवत्ता और आमजन की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए।
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