जबलपुर में दिवाली पर मिठाई बिक जाती है, 5 करोड़ की फूड लैब से महीनों बाद आ रही रिपोर्ट
जबलपुर में दिवाली पर मिलावटी खाद्य पदार्थों का खतरा बढ़ गया है। करोड़ों की परीक्षण प्रयोगशाला चालू न होने से नमूनों की जांच रिपोर्ट भोपाल से आने में महीनों लग रहे हैं।
Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 10:26:48 AM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 10:26:48 AM (IST)
जबलपुर में मिलावटखोरों की चांदी। (फाइल फोटो)HighLights
- दिवाली पर जबलपुर में मिलावटी मावा-पनीर की बिक्री का खतरा।
- 5 करोड़ की फूड टेस्टिंग लैब बनी, लेकिन जांच बंद।
- भोपाल से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में महीनों लग रहे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: दिवाली पर मिठाई और नमकीन की मांग बढ़ते ही मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। ज्यादा मुनाफे के लिए कुछ कारोबारी मावा, पनीर और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट करते हैं, तो कहीं पुराने मावे और एक्सपायरी रेडी-टू-मिक्स उत्पादों के इस्तेमाल की आशंका रहती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग छापे मारकर नमूने तो लेता है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में महीनों लगने से कार्रवाई का असर सीमित रह जाता है। तब तक संबंधित खाद्य सामग्री बिक चुकी होती है और उपभोक्ता उसकी कीमत अपनी सेहत से चुका चुके होते हैं। इस बार त्योहार करीब आ चुका है, लेकिन न तो मिठाई एवं नमकीन रफ्तार पकड़ सकी, नही नमूने जांचने वाली खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला अभी तक अपनी क्षमता से काम शुरू कर सकी है। इससे त्योहार पर मिलावटी खाद्य पदार्थों की खपत की आशंका बनी हुई है।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की जांच जारी है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलने पर उसे नष्ट कराया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपित पर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। त्योहारी सीजन के चलते अचानक जांच एवं छापेमारी भी की जा रही है।
मिलावट का हर निवाला सेहत पर भारी
- मिलावटी पनीर, मावा और उससे निर्मित मिठाईयों से पेट संबंधी संक्रमण और उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- दूषित खाद्य पदार्थों में हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। वहीं, नमकीन में घटिया तेल, बार-बार गर्म किया गया तेल, खराब मसाले और असुरक्षित रंग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।
- मिठाइयों में गैर-अनुमोदित रंग या दूषित सामग्री का इस्तेमाल भी जोखिम बढ़ाता है। पुराना होना अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं, लेकिन अनुचित भंडारण से खाद्य सामग्री असुरक्षित हो सकती है।
प्रयोगशाला तैयार, जांच का इंतजार
- डुमना रोड पर खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का का भवन वर्ष 2022 में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ। इसमें खाद्य और औषधि जांच की अलग-अलग सुविधाएं प्रस्तावित थीं। हालांकि, खाद्य पदार्थों की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
फूड लैब को एनएबीएल प्रमाणन नहीं मिलने के कारण जांच शुरू करने में बाधा है। फिलहाल नमूने भोपाल भेजे जा रहे हैं। इसके कारण कुछ नमूनों की रिपोर्ट आने में तीन महीने से अधिक समय लग रहा है। तब तक खाद्य पदार्थी बिक चुकी होती है और उपभोक्ता उसका सेवन कर चुके होते है। नौ महीने के आंकड़े, आधी रिपोर्ट का इंतजार
- 497 खाद्य नमूने जनवरी से सितंबर तक लिए गए।
- 257 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई।
- 157 नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए।
- 33 नमूने जांच में फेल हुए।
- 52 मामलों में विभागीय कार्रवाई दर्ज की गई।
- 14.80 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
- मिठाई खरीदते समय उसकी रंगत, गंध और बनावट देखें। असामान्य चमक, तीखी कृत्रिम गंध, खट्टी गंध व चिपचिपाहट संदेह पैदा कर सकती है, हालांकि केवल देखकर मिलावट का पता नहीं चलता। दुकानदार से निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और सामग्री की जानकारी पूछ सकते है।
- गंदगी होने एवं काकरोच दिखने या मक्खियां भिनभिनाती दिखे तो वहां से खाद्य सामग्री न लें। खुले में रखी मिठाइयों के बजाय ढकी हुई सामग्री खरीदें और बिल जरूर लें। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें।
हाल में हुई कार्यवाही में सामने आया था...
- उमरिया स्थित लवकुश चौरसिया की मावा फैक्ट्री में निरीक्षण में गंदगी और बिना पक्के फर्श-दीवारों वाले निर्माण स्थल पर मावा बनता मिला। दो नमूने लेकर खाद्य पंजीयन निलंबित किया गया।
- लम्हेटा में मुकेश सिंह की मावा फैक्ट्री में निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत होने पर मावा के दो नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए भोपाल भेजा गया।
- बघोड़ा के जैनम फूड प्रोडक्ट के परिसर में फ्राइम्स को खुले में सुखाने और कर्मचारियों के पैरों से कुचलने की स्थिति सामने आई। इस मामले में विभागीय कार्रवाई की गई।
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