
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में नशीले पदार्थों तथा संदिग्ध रसायनों की तस्करी की पहचान को आसान बनाने के उद्देश्य से जबलपुर इंजीनियरिंग काॅलेज (जेईसी) के विद्यार्थियों ने तकनीक आधारित एक अभिनव समाधान तैयार किया है।
स्मार्ट इंडिया हैकाथान 2026 के तहत कालेज की छात्र टीम ‘युक्ति’ ने (डिटेक्ट्रा) नाम से एक हैंडहेल्ड डिवाइस विकसित किया है। डिटेक्ट्रा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे सुरक्षा कर्मी हाथ में लेकर रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्म, प्रतीक्षालय, लगेज एरिया अथवा अन्य संवेदनशील स्थानों पर आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
डिवाइस आसपास की हवा में मौजूद संदिग्ध रासायनिक संकेतों को सेंसर के माध्यम से पहचानने का प्रयास करता है। संदिग्ध संकेत मिलने पर इसमें बीप और एलईडी लाइट के जरिए तत्काल अलर्ट मिलता है। इससे सुरक्षा कर्मियों को किसी स्थान या सामान की आगे जांच करने के लिए शुरुआती संकेत मिल सकता है।
इसकी खासियत यह है कि डिवाइस को किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। हैंडहेल्ड होने के कारण सुरक्षा कर्मी इसे जरूरत के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर जांच कर सकते हैं। इससे रेलवे जैसे बड़े और लगातार गतिशील परिसर में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।
रेलवे में बड़ी संख्या में यात्रियों और सामान की आवाजाही के कारण सुरक्षा जांच एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में संदिग्ध पदार्थों की पहचान के लिए तेज, पोर्टेबल और किफायती तकनीकी उपकरण उपयोगी साबित हो सकते हैं। डिटेक्ट्रा इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया छात्र नवाचार है।
डिटेक्ट्रा को केवल स्थानीय स्तर पर अलर्ट देने तक सीमित नहीं रखा गया है। टीम ने इसमें जीपीएस आधारित लोकेशन सिस्टम और लाइव डैशबोर्ड की अवधारणा भी शामिल की है। किसी संदिग्ध संकेत की पहचान होने पर संबंधित लोकेशन की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
इससे सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अलर्ट किस स्थान पर उत्पन्न हुआ है। लाइव डैशबोर्ड के माध्यम से प्राप्त जानकारी को एक केंद्रीकृत निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी यह प्रोटोटाइप उपयोगी हो सकता है। इससे अलग-अलग स्थानों से मिलने वाले अलर्ट की निगरानी और रिकार्ड रखने में सुविधा मिल सकती है।
रेलवे में सुरक्षा जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों की लागत काफी अधिक हो सकती है। डिटेक्ट्रा को सीमित संसाधनों में कम लागत वाले विकल्प के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया है।
कम लागत और पोर्टेबल डिजाइन के कारण भविष्य में इस तरह की तकनीक को अधिक संख्या में सुरक्षा जांच बिंदुओं तक पहुंचाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। वास्तविक रेलवे परिचालन में इस्तेमाल से पहले उपकरण की सटीकता, विश्वसनीयता, विभिन्न परिस्थितियों में प्रदर्शन और सुरक्षा मानकों का विस्तृत परीक्षण आवश्यक होगा।
डिटेक्ट्रा का माडल टीम ‘युक्ति’ के विद्यार्थियों ने तैयार किया है। टीम में अरुणिमा घोष, शालिनी सिंह, सोहम बिस्वास, गौरी सुदर्शन, वर्षा वर्मा और वैष्णवी कुशवाहा शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में हर्ष ठाकुर और ऋतिक नायर ने तकनीकी सहयोग दिया।
छात्रों ने उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी ज्ञान का उपयोग करते हुए रेलवे सुरक्षा से जुड़ी समस्या के लिए एक ऐसा माॅडल विकसित करने का प्रयास किया है, जिसे भविष्य में और अधिक उन्नत बनाया जा सके। प्रोजेक्ट में सेंसर आधारित डिटेक्शन, अलर्ट सिस्टम, जीपीएस और डिजिटल निगरानी जैसे अलग-अलग तकनीकी पहलुओं को एक ही पोर्टेबल डिवाइस में जोड़ने का प्रयास किया गया है।
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