
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बाजार में किसी खाद्य पदार्थ को अक्सर लोग सीधे नकली या मिलावटी कह देते हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा के नियमों में हर खराब या घटिया उत्पाद को नकली कहना सही नहीं है। कोई उत्पाद तय मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
यह जानकारी खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित गुप्ता ने सोमवार को आयोजित नईदुनिया विमर्श कार्यक्रम में दी। उन्होंने दूध और उससे बनने वाले उत्पादों में गुणवत्ता की जांच, पनीर में मिलावट, घी की जांच और त्योहार सीजन में खोवा की निगरानी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने नईदुनिया के संपादकीय सदस्यों को बताया कि होटल और रेस्टोरेंट के मेन्यू में पनीर से बने व्यंजनों की संख्या अधिक रहती है। पनीर की मांग लगातार बनी रहती है और इसकी कीमत भी अपेक्षाकृत अधिक है। यही वजह है कि इसमें मिलावट या गुणवत्ताहीन उत्पाद की शिकायतें सामने आती हैं। बाजार में मुख्य रूप से दूध से तैयार पनीर और एनालाग पनीर जैसे उत्पाद मिलते हैं। एनालाग पनीर में दूध के बजाय या दूध के साथ अन्य वसा और प्रोटीन स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने उपभोक्ताओं को पनीर की गुणवत्ता को लेकर जागरूक करते हुए एक सामान्य घरेलू परीक्षण की जानकारी दी। उनके अनुसार पनीर को दबाने पर उसकी बनावट और टूटने का तरीका देखकर मोटे तौर पर अंतर समझा जा सकता है।
यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू परीक्षण को प्रयोगशाला जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि पनीर की मांग अधिक होने के कारण बाजार में गुणवत्ताहीन उत्पाद की बिक्री की संभावना बढ़ जाती है। एनालॉग पनीर अक्सर पैकिंग में उपलब्ध होता है, इसलिए उपभोक्ता को लेबल पर उत्पाद का नाम, सामग्री और अन्य आवश्यक विवरण जरूर देखना चाहिए।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली वसा अलग-अलग स्रोतों से आ सकती है। दूध से मिलने वाली वसा के अलावा वनस्पति स्रोतों से मिलने वाली वसा का भी इस्तेमाल होता है। पाम ऑयल सहित अन्य वनस्पति वसा का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन उपभोक्ता को यह देखना चाहिए कि उत्पाद की सामग्री और लेबलिंग सही है या नहीं।
खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर शिकायत होने पर उपभोक्ता संबंधित खाद्य सुरक्षा पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। इससे विभाग को बाजार में मौजूद संदिग्ध उत्पादों की जानकारी मिलने में मदद मिलती है। त्योहार का मौसम शुरू होने के साथ खाद्य सुरक्षा विभाग ने खोवा की जांच पर भी फोकस बढ़ाया है। इस दौरान खोवा की खपत काफी बढ़ जाती है और बाजार में बड़ी मात्रा में इसकी आवक होती है। विभाग की टीमें खोवा के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कर रही हैं।
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