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नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में पति की एफआइआर निरस्त करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने में देरी मात्र से आरोप झूठे या एफआइआर जवाबी कार्रवाई में दर्ज मान लेना उचित नहीं है। आरोपों की सत्यता का परीक्षण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।
जबलपुर निवासी पति राजेश कुमार ने दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने में काफी देर हुई। उन्होंने विवाह के खर्च के बिल पेश किए और चार पहिया वाहन की मांग से इन्कार किया। पति पक्ष के अनुसार, पत्नी मनीषा का स्त्रीधन और विवाह में मिला सामान उसके पास ही है।
पत्नी ने आरोप लगाया कि विवाह के बाद से उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। उसके अनुसार, मायके पक्ष ने विवाह में 60 से 70 लाख रुपये खर्च किए और 15 लाख रुपये नकद समेत अन्य सामान दिया। उसने पति पर हनीमून के दौरान भी पैसे मांगने का आरोप लगाया। पत्नी ने कहा कि वैवाहिक संबंध बचाने की उम्मीद में उसने तत्काल शिकायत नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट के सुप्रिया जैन बनाम हरियाणा राज्य मामले का उल्लेख करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जांच में जुटाए गए साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन विचारण न्यायालय में होना चाहिए। कोर्ट ने एफआइआर और आपराधिक कार्यवाही निरस्त करने का आधार नहीं पाया। आरोपों की अंतिम सत्यता साक्ष्यों के परीक्षण के बाद तय होगी।
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