
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाईकोर्ट ने एनएसए के तहत निरुद्ध दो सगे भाइयों राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया की नजरबंदी निरस्त कर दी।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए छह जनवरी 2026 को जबलपुर के जिला कलेक्टर द्वारा पारित नजरबंदी आदेश रद कर दिया।
पुराने मामलों में नहीं लगेगी रासुका
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पैरवी की। कोर्ट ने पाया कि नजरबंदी के आधार में बताए गए 22 मामलों में अधिकांश वर्ष 2001 से 2015 के बीच के पुराने मामले थे। वर्ष 2015 के बाद केवल दो आपराधिक मामले सामने आए।
कोर्ट ने कहा कि पुराने और बासी मामलों के आधार पर रासुका जैसे असाधारण कानून का यांत्रिक ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आदेश में जिला कलेक्टर द्वारा स्वतंत्र रूप से मस्तिष्क का प्रयोग किया जाना दिखाई नहीं देता।
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कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के अमीना बेगम बनाम तेलंगाना राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि निवारक निरोध असाधारण उपाय है। नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। अप्रैल और जुलाई में बढ़ाई गई नजरबंदी की अवधि भी आदेश निरस्त होने के साथ समाप्त हो गई।
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