जब पद समान है तो वेतन में अलग-अलग क्यों?, MP हाई कोर्ट ने राज्य शासन से पूछा सवाल, जिम्मेदारों को नोटिस
जबलपुर हाई काेर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट ने एक समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के अलग-अलग वेतन को लेकर दायर याचिका पर सुवनाई की। हाई कोर्ट के जज ने ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 20 Jan 2026 05:33:31 AM (IST)Updated Date: Tue, 20 Jan 2026 05:37:04 AM (IST)
समान पद के लिए अलग-अलग वेतन को लेकर हाई कोर्ट ने पुछा सवालHighLights
- जब पद समान है तो वेतन में विसंगति क्यों- हाई कोर्ट
- सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा नोटिस
- समान योग्यताएं व अहर्ताओं वाले दो पदों पर वेतन अलग
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जबलपुर पीठ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर और डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी मोबिलाइजर के पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के अलग-अलग वेतन को लेकर एक याचिका पर सुनवाई की। दोनों पदों के काम समान हैं, लेकिन इनके वेतन अलग-अलग हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई काेर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने राज्य शासन से पूछा है कि जब पद समान है तो वेतन में विसंगति क्यों है। कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, नेशनल हेल्थ मिशन के संचालक, सीएमएचओ जबलपुर व अन्य को नोटिस जारी किए हैं।
इन पदों पर वेतन अलग-अलग
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अमित चंद्रा सहित नरसिंहपुर, रीवा व जिलों के कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता शिशिर सोनी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम) के पद पर कार्यरत हैं। दलील दी गई कि वर्ष 2008 में सरकार ने विज्ञापन जारी कर बीपीएम और डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी मोबिलाइजर (डीसीएम) के पद भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था।
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यह दलील रखी गई
दोनों के पदों के लिए समान योग्यताएं व अहर्ताएं मांगी गई थीं। बीपीएम के लिए चयनित कर्मियों को डीसीएम से दो हजार रुपये अधिक वेतन पर रखा गया था। दलील दी गई कि वर्ष 2013 से बीपीएम कर्मियों को डीसीएम के मुकाबले कम वेतन दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों को कई अभ्यावेदन दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।