• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

निजी अस्पतालों के पंजीयन पर जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, चार दिन में ताजा स्थिति रिपोर्ट देने को कहा, 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई

निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्थिति ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 02:27:58 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 02:39:15 PM (IST)
निजी अस्पतालों के पंजीयन पर जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, चार दिन में ताजा स्थिति रिपोर्ट देने को कहा,  12 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सरकार से चार दिन में मांगी ताजा स्थिति रिपोर्ट, फाइल फोटो

HighLights

  1. अस्पतालों के पंजीयन में बरती गई लापरवाही
  2. सरकार से चार दिन में मांगी ताजा स्थिति रिपोर्ट
  3. पांच जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट का निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीयन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर पांच जनहित याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि फायर सेफ्टी और नगर निगम की आवश्यक अनुमति के बिना भी नए निजी अस्पतालों को पंजीयन दिए जा रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार के अनुरोध पर ताजा रिपोर्ट पेश करने के लिए चार दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

जबलपुर में करीब 160 अस्पताल-नर्सिंग होम

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि जबलपुर शहर में करीब 160 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित हैं। इनमें 63 का पंजीयन वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए जाने की जानकारी सामने आई है।


भौतिक सत्यापन के बिना पंजीयन का आरोप

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा नए निजी अस्पतालों के पंजीयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि अस्पतालों का भौतिक सत्यापन किए बिना ऑनलाइन आवेदन और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी किए जा रहे हैं। याचिकाओं में इस प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

यह भी पढ़ें- Gwalior: रेलवे ने कई ट्रेनों के संचालन में किया बदलाव, 15 अक्टूबर को ललितपुर तक ही जाएगी शताब्दी एक्सप्रेस, कई ट्रेनें रहेंगी लेट

फायर सेफ्टी और नगर निगम की अनुमति पर सवाल

याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से सवाल उठाया है कि यदि किसी अस्पताल के पास आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र अथवा नगर निगम की अनुमति नहीं है, तो उसका पंजीयन किस आधार पर किया जा रहा है। सोमवार को राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने बताया कि पूर्व में स्थिति रिपोर्ट पेश की जा चुकी है और वर्तमान स्थिति से संबंधित ताजा रिपोर्ट के लिए चार दिन का समय चाहिए।

कोर्ट ने समय देते हुए निर्देश दिया कि नई रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकें। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और अमिताभ गुप्ता ने पैरवी की। अब 12 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार की ताजा रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की दिशा तय होगी।

यह भी पढ़ें- त्योहारी सीजन में रेलवे की बड़ी राहत, प्रयागराज-पुणे के बीच नई पूजा स्पेशल ट्रेन; वलसाड-दानापुर के 8-8 फेरे बढ़े