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धान पंजीयन में नई व्यवस्था लागू, जबलपुर के किसानों ने नहीं पटवारियों ने कराया पहली बार रिकॉर्ड पंजीयन

मझौली में 15,990 किसानों का पंजीयन- इस बार किसानों का धान पंजीयन 60 हजार के पार पहुंच गया है। पंजीयन खत्म होने के बाद सामने आए आंकड़ों ने इस बार जबलपु...और पढ़ें

By Atul ShuklaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 09:19:46 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 09:19:46 PM (IST)
धान पंजीयन में नई व्यवस्था लागू, जबलपुर के किसानों ने नहीं पटवारियों ने कराया पहली बार रिकॉर्ड पंजीयन
पिछले वर्ष जिले में 55 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था। सौजन्‍य एआई

HighLights

  1. हर किसान के खसरे और भूमि रिकार्ड का दर्ज हुआ डाटा
  2. प्रक्रिया में बदलाव कर जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपी
  3. रिकॉर्ड को अलग-अलग दर्ज करने पर जोर दिया गया

अतुल शुक्ला, नईदुनिया जबलपुर। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जबलपुर जिले में इस बार किसानों के पंजीयन का आंकड़ा 60 हजार के पार पहुंच गया है। जिले में अब तक का यह सर्वाधिक पंजीयन है।

प्रक्रिया में बदलाव कर जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपी

खास बात यह है कि इस बार पंजीयन की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए इसकी जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपी गई थी। नई व्यवस्था में किसानों के खसरे और भूमि संबंधी डाटा को समूह में नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से अपडेट किया गया।

रिकॉर्ड को अलग-अलग दर्ज करने पर जोर

इससे पंजीयन की प्रक्रिया में राजस्व अमले की भूमिका बढ़ी और प्रत्येक किसान के रिकॉर्ड को अलग-अलग दर्ज करने पर जोर दिया गया। पिछले वर्ष जिले में धान बेचने के लिए करीब 55 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था।

इस बार पंजीयन का आंकड़ा उससे आगे निकल गया है। हालांकि, आठ अक्टूबर 2026 की तहसीलवार रिपोर्ट में जिले में कुल 49,316 पंजीयन दर्ज थे। ऐसे में 60 हजार से अधिक पंजीयन का आंकड़ा बाद की तारीख का है, जिसकी अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि की जानी चाहिए।


पंजीयन प्रक्रिया में किया गया बदलाव

इस बार पंजीयन व्यवस्था में किसानों के व्यक्तिगत भूमि रिकार्ड रखा गया। पटवारियों को पंजीयन की जिम्मेदारी दिए जाने के साथ खसरे और संबंधित जानकारी को अपडेट करने का काम कराया गया। पहले पंजीयन के दौरान परिवार के सदस्यों अथवा अन्य किसानों की जानकारी जोड़ने की जो गुंजाइश रहती थी, नई व्यवस्था में व्यक्तिगत रिकॉर्ड के आधार पर पंजीयन पर जोर दिया गया। इससे वास्तविक भू-स्वामी और उसकी भूमि से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

धान पंजीयन में मझौली सबसे आगे

मझौली में 15,990 किसानों का पंजीयन- इस बार किसानों का धान पंजीयन 60 हजार के पार पहुंच गया है। पंजीयन खत्म होने के बाद सामने आए आंकड़ों ने इस बार जबलपुर जिले के पंजीयन रिकार्ड को तोड़ दिया है।

कुल 88 हजार 330.34 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन

मझौली तहसील पंजीयन के मामले में सबसे आगे है। यहां 15 हजार 990 किसानों ने पंजीयन कराया है। इसके बाद सिहोरा में 14 हजार 204 और पनागर में 9 हजार 945 किसानों का पंजीयन हुआ है। जिले में कुल 88 हजार 330.34 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन दर्ज किया गया है।

बाजरा के लिए छह और ज्वार के लिए 13 पंजीयन

इसके विपरीत बाजरा के लिए छह और ज्वार के लिए 13 पंजीयन दर्ज किए गए हैं, जबकि सोयाबीन के लिए कोई पंजीयन नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि जिले में पंजीयन कराने वाले किसानों का मुख्य फोकस धान की फसल पर है।

तहसीलवार भी बढ़ा पंजीयन

तहसीलवार स्थिति देखें तो मझौली और सिहोरा में मिलाकर 30,194 पंजीयन हुए हैं। यह जिले के कुल पंजीयन का लगभग आधा है। पनागर में 9,945, पाटन में 5,601, शाहपुरा में 4,290 और कटंगी में 3,927 किसानों ने पंजीयन कराया है। जबलपुर तहसील में 3,759 पंजीयन दर्ज किए गए हैं। अन्य तहसीलों में कुंडम में 1,679, गोरखपुर में 466, अधारताल में 192 और रांझी में 97 पंजीयन हुए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तहसीलों में पंजीयन की संख्या अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्र की तहसीलों में यह अपेक्षाकृत कम है।

  • कुल पंजीयन : 60,150
  • कुल पंजीकृत रकबा : 88,330.34 हेक्टेयर
  • धान : 60,148 पंजीयन
  • बाजरा : 6 पंजीयन
  • ज्वार : 13 पंजीयन
  • सोयाबीन : शून्य पंजीयन
  • सर्वाधिक पंजीयन : मझौली (15,990)
  • सबसे कम पंजीयन : रांझी (97)

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